जमुई , जनवरी 23 -- जमुई जिले के बरहट प्रखंड के कटौना इलाके में किसान योगेंद्र पंडित ने बंजर जमीन पर जैविक खेती की अनूठी मिसाल पेश की है।

इससे बढिया उदाहरण और क्या होगा कि जिस बंजर जमीन पर केवल लाशें जलती थी, वहीं आज हरियाली लहलहा रही है। बीते एक दशक से किसान योगेंद्र पंडित बिना किसी रासायनिक खाद और कीटनाशक के जैविक खेती कर रहे हैं। करीब 5 एकड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और वैज्ञानिक सोच से खेती की तस्वीर बदली जा सकती है।

योगेंद्र पंडित अपने पूरे परिवार के साथ खेती में जुटे हुए हैं। उनके खेतों में आलू, गेहूं, चावल जैसी पारंपरिक फसलों के साथ करीब 150 प्रकार के औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं।

इन औषधीय पौधों से श्री पंडित कई तरह की घरेलू और आयुर्वेदिक दवाइयां भी तैयार करते हैं, जिससे लोगों को प्राकृतिक इलाज के प्रति जागरूक किया जा सके।

योगेंद्र पंडित का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज को रोगमुक्त बनाना है। श्री पंडित मानते हैं कि रासायनिक खेती ने जहां उत्पादन बढ़ाया, वहीं बीमारियों को इससे बढ़ावा मिला। योगेंद्र ने इस सोच के साथ जैविक और औषधीय खेती को अपना मिशन बना लिया है कि लोगों के लिए पौष्टिक और सुरक्षित खाद्य का उत्पादन करना है।

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