श्रीनगर , फरवरी 23 -- दक्षिणी कश्मीर में रेलवे विस्तार परियोजनाओं को हाल ही में रोक दिये जाने के बाद उत्तरी कश्मीर में प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि दक्षिण कश्मीर में प्रस्तावित रेल लाइनों को जन प्रतिनिधियों की आपत्तियों और सेब के बागानों को नुकसान पहुंचने की चिंताओं के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

यह रोक सेब के बागानों को संभावित नुकसान के कारण लगायी गयी थी। कई मार्गों पर सर्वेक्षण शुरू हो गया था, लेकिन आगे की समीक्षा होने तक परियोजनाओं को रोक दिया गया था। अब यह मुद्दा उत्तरी कश्मीर की ओर मुड़ गया है। यहां के निवासियों और राजनेताओं ने प्रस्तावित बारामूला-उड़ी रेलवे को लेकर आपत्तियां जतायी हैं। उन्होंने इसके संभावित विस्थापन और महत्वपूर्ण विरासत व आवासीय क्षेत्रों को होने वाले नुकसान का हवाला दिया है।

भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य गुलाम अली खटाना ने हाल ही में संसद में रेल मंत्री से मुलाकात की और बारामूला की शेरवानी कॉलोनी, जेटी और फतेहपोरा के निवासियों की चिंताओं से पत्र सौंपकर उन्हें अवगत कराया।

श्री खटाना ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र में लिखा है, "निवासियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि यह योजना घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। इसमें ऐतिहासिक शेरवानी कॉलोनी भी शामिल है, जिसे 1947 में घुसपैठियों से कश्मीर की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी शहीद मोहम्मद मकबूल शेरवानी की स्मृति में 1961 में स्थापित किया गया था।"उन्होंने कहा कि निवासियों को आशंका है कि यदि यह योजना लागू की गयी तो इसके परिणामस्वरूप परिवारों का बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। पुराने बसे हुए घर ढहा दिए जाएंगे और उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक पहचान को स्थायी नुकसान होगा।

सांसद ने आगे लिखा, "घर केवल एक ढांचा नहीं होता, बल्कि एक परिवार की आत्मा होता है, जिसे जीवन भर की जमा पूंजी और यादों से बनाया जाता है। इसके नुकसान की भरपाई भौतिक रूप से नहीं की जा सकती, विशेष रूप से बुजुर्ग निवासियों के लिए। उन्होंने विनम्रतापूर्वक अपील की है कि इस योजना की समीक्षा की जाए और इस पर पुनर्विचार किया जाए तथा कम आबादी वाले या खाली क्षेत्रों के माध्यम से वैकल्पिक मार्गों की खोज की जाए।"पत्र में आगे कहा गया, "अतः, मेरा आपसे अनुरोध है कि संपर्क के राष्ट्रीय हित के साथ-साथ न्याय और मानवीय शासन के संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक और तत्परता से विचार किया जाए।"श्री खटाना ने कहा कि मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि अन्य वैकल्पिक मार्गों की जांच करते समय हितधारकों के साथ परामर्श कर रेलवे सर्वेक्षण की समीक्षा की जायेगी।

बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद ने भी केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष यह मामला उठाया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान प्रस्तावित मार्ग आवासीय बस्तियों को प्रभावित करता है और इससे परिवारों का विस्थापन व सामुदायिक बुनियादी ढांचे में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

अवामी इत्तिहाद पार्टी के प्रवक्ता इनाम उन नबी के अनुसार, केंद्रीय रेल मंत्रालय ने आवश्यक कार्रवाई के लिए इंजीनियर रशीद के प्रतिवेदन को संबंधित निदेशालय को भेज दिया है।

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