नारायणपुर/रायपुर , मार्च 18 -- छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी उसेंडी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव दो मतों से गिर गया।
जनपद पंचायत की कार्यवाही में हुए मतदान के दौरान अध्यक्ष के पक्ष में आठ मत पड़े, जबकि प्रस्ताव के समर्थन में महज छह सदस्यों ने मतदान किया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 17 सदस्यीय जनपद पंचायत में कुल 14 मत वैध पाए गए। दो सदस्यों ने मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लिया, जबकि एक मत को अवैध घोषित कर दिया गया। अध्यक्ष पिंकी उसेंडी के पक्ष में आठ डाले जाने के साथ ही यह प्रस्ताव दो मतों के अंतर से परास्त हो गया। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट 19 मार्च को जिला कलेक्टर को सौंपी जाएगी।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व जिला कलेक्टर को एक ज्ञापान सौंपकर अविश्वास प्रस्ताव की मांग की गई थी। इसके आधार पर एसडीएम अभयजीत मंडावी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करते हुए यह पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने पोस्ट में कहा, "भाजपा का लोकतंत्र विरोधी चरित्र आ गया सामने। नारायणपुर जनपद में जहां भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है, वहीं उसे विफल कराने के लिए भाजपा जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं ने सदस्यों पर दबाव, धमकी और गुंडागर्दी की।"वहीं, भाजपा जिला अध्यक्ष संध्या पवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के नेताओं ने सदस्यों को अविश्वास प्रस्ताव की जानकारी नहीं दी और उन्हें भ्रमित करके घूमने के बहाने ले गए थे। संध्या पवार ने यह भी दावा किया कि 17 सदस्यों में से 13 भाजपा के हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है।
कांग्रेस छत्तीसगढ़ के आरोपों पर भाजपा के प्रवक्ता शिवनारायण पांडेय ने कहा कि भाजपा के नेता अवैध या असंवैधानिक कार्यों में शामिल ही नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुई और जनपद अध्यक्ष ने विश्वास मत जीतकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
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