भोपाल , दिसंबर 21 -- मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भोपाल में नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि "संभावना" के अंतर्गत रविवार को बुंदेलखंड की समृद्ध लोक परंपरा का सजीव प्रदर्शन देखने को मिला। इस अवसर पर गंजबासोदा से आए गोविंदसिंह यादव एवं उनके साथियों द्वारा राई नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई।
राई नृत्य बुंदेलखंड के जनमानस के हर्ष, उल्लास और जीवन्तता को अभिव्यक्त करता है। इस नृत्य में कलाकार फागें गाते हुए नृत्य करते हैं। राई के गीत ख्याल, स्वांग सहित विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किए जाते हैं। मृदंग की थाप पर घुंघरुओं की झंकार और स्वांग के साथ किया गया नृत्य दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ लोक परंपरा का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करता है। राई नृत्य के साथ विशेष रूप से प्रसिद्ध लोक कवि ईसुरी की फागें भी गाई गईं, जिन्होंने प्रस्तुति को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय परिसर में प्रत्येक रविवार दोपहर 2 बजे से आयोजित होने वाली इस गतिविधि के माध्यम से प्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की विविध कला परंपराओं के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के लोक कलारूपों को देखने और समझने का अवसर आमजन को प्राप्त होता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित