भोपाल , दिसंबर 30 -- मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भोपाल में नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित तीन दिवसीय गतिविधि "संभावना" का शुभारंभ आज किया गया। यह आयोजन 30 दिसंबर 2025 से 01 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्यों के साथ-साथ अन्य राज्यों की लोक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
शुभारंभ दिवस पर दीप प्रज्वलन एवं कलाकारों के स्वागत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कलाकारों का स्वागत जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे द्वारा किया गया।
आज के कार्यक्रम में गुदुमबाजा नृत्य श्री मुरारीलाल एवं साथी डिण्डोरी, बरेदी नृत्य श्री दिलीप यादव एवं साथी छतरपुर, गोटीपुआ नृत्य बाबा गोरखनाथ गोटीपुआ डांस एसोसिएशन उड़ीसा, कानड़ा नृत्य-गायन श्री घूमन प्रसाद पटेल एवं साथी दमोह, पंथी नृत्य श्री दिनेश कुमार जांगड़े एवं साथी दुर्ग, भजन गायन सुश्री श्रद्धा व्यास एवं साथी भोपाल, पण्डवानी गायन सुश्री सम्प्रिया पूजा एवं साथी दुर्ग तथा निमाड़ी लोकगायन सुश्री मनीषा शास्त्री एवं साथी महेश्वर द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं।
निमाड़ी लोकगायन में गणेश भजन, मां नर्मदा पर आधारित गीतों सहित अन्य लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई। भजन गायन में कृष्ण भक्ति से जुड़े प्रसिद्ध भजनों का गायन हुआ, जबकि पण्डवानी गायन में भगवान श्रीकृष्ण के हस्तिनापुर शांति प्रस्ताव सहित पाण्डव विजय प्रसंग को कथा शैली में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में गुदुमबाजा, बरेदी, गोटीपुआ, कानड़ा और पंथी जैसे लोकनृत्यों के माध्यम से विभिन्न जनजातीय और क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया गया। 31 दिसंबर 2025 को गोंड जनजातीय करमा-सैला नृत्य, गोटीपुआ, पंथी, कालबेलिया, सौंगीमुखौटा, बघेली लोकगीत, गढ़वी गायन और आल्हा गायन की प्रस्तुतियां होंगी।
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