चंडीगढ़ , मई 05 -- कांग्रेस विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने पंजाब सरकार की ओर से प्रकाशित जनगणना से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज में 'आपत्तिजनक एवं असंवैधानिक' भाषा के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की है और इसे दलित समुदाय की गरिमा पर सीधा हमला करार देते हुए केंद्र तथा आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार, दोनों को इसका जिम्मेदार ठहराया है।

श्री धालीवाल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी फॉर्म में इस तरह की भाषा का प्रयोग अत्यंत चिंताजनक और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, निगरानी और शासन के मानकों में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट रूप से ऐसी अपमानजनक शब्दावली के उपयोग पर रोक लगाई है। किसी भी सरकारी दस्तावेज में इसका मौजूद होना एक गंभीर संस्थागत विफलता है।" उन्होंने इस त्रुटि के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इस गलती को तुरंत सुधारा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आक्रोश के बाद केवल स्पष्टीकरण देना काफी नहीं है; सरकार को इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस घटना ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सुधारोन्मुखी शासन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, इस तरह के मामले व्यवस्था के भीतर प्रभावी निगरानी और संवेदनशीलता की कमी को उजागर करते हैं।

उन्होंने कहा कि शासन में जाति-आधारित अपमान या भेदभाव के लिए 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) होनी चाहिए। पंजाब के लोग इस तरह के अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेंगे और सरकार को संवैधानिक मूल्यों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

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