गुवाहाटी , फरवरी 11 -- असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 10 फरवरी को दिये गये एक फ़ैसले में बेदखली की कार्रवाई की प्रक्रिया को आसान बना दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने 10 फरवरी को अपने फ़ैसले में असम के दोयांग, साउथ नंबर, जमुना मडुंगा, बरपानी, लुटुमाई और गोलाघाट सुरक्षित वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कब्ज़ा हटाने की कार्रवाई करने के तरीके पर असम राज्य के नये हलफ़नामे के आधार पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश में बदलाव किया।

शीर्ष अदालत की ओर से 10 फरवरी को जारी निर्देशों के अनुसार, बेदखली के नोटिस दिये जाने के बाद मामला वन और राजस्व अधिकारियों की एक संयुक्त समिति को भेजा जाता है। समिति को कब्ज़ा करने वालों की बात सुनने और उनके पेश किये गये किसी भी सबूत पर विचार करने का अधिकार है। हटाने की कार्रवाई तभी की जाती है जब यह पक्का हो जाता है कि कब्ज़ा हुआ है। बिना इजाज़त कब्ज़ा खाली करने के लिए 15 दिन का नोटिस सकारण आदेश के ज़रिए जारी किया जाता है।

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