वाराणसी , मार्च 6 -- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिनों के अंदर गौमाता को 'राज्यमाता' घोषित करने तथा प्रदेश में पूर्ण रूप से गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग के समयावधि के 35 दिन पूर्ण होने पर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर शुक्रवार शाम को शंकराचार्य घाट पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य महाराज ने विधिवत गंगा पूजन किया। इसके पश्चात छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर तिलक लगाकर पुष्प अर्पित किए तथा उपस्थित सभी लोगों को गौरक्षा का संकल्प दिलाया।

शंकराचार्य महाराज ने छत्रपति शिवाजी महाराज के गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक होने पर शास्त्रीय आधार पर विवेचना करते हुए संदेश दिया कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे। उन्होंने मात्र 12 वर्ष की आयु में एक गौहत्यारे को दंडित कर उसके हाथों से गौमाता को छुड़ाया था तथा गौमाता की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगाने का उद्घोष किया था।

सनातन धर्म के शास्त्रों में कहा गया है कि राजा को गौ, ब्राह्मण तथा देवायतनों की रक्षा के लिए कटिबद्ध रहना चाहिए। हमारे यहां भगवान राम ने भी विश्वामित्र के समक्ष प्रतिज्ञा करते हुए कहा था कि गौ-ब्राह्मण तथा राष्ट्रहित के लिए ऋषिवर जो भी कहें, उसे पूर्ण करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूं। भगवान राम, कृष्ण, आदि शंकराचार्य, राणा प्रताप तथा शिवाजी महाराज ने जो मार्ग प्रशस्त किया, उसी मार्ग पर चलते हुए शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज ने 'बुधभूषणम्' ग्रंथ में दृढ़ता से अंकित किया है कि जो क्षत्रिय गाय, ब्राह्मण तथा मंदिरों की रक्षा के लिए प्राण त्यागता है, वह स्वर्ग का अधिकारी होता है और उसकी कीर्ति अनंत काल तक प्रतिष्ठित रहती है।

शंकराचार्य महाराज ने कहा कि आज शिवाजी जयंती के अवसर पर प्रत्येक हिंदू को यह संकल्प करना चाहिए कि अपने बीच ही कुछ लोग गाय, ब्राह्मण तथा मंदिरों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। उनसे धर्मयुद्ध लड़कर छद्म हिंदुओं को पहचानने का समय आ गया है। इसी का शुभारंभ हम आज से कर रहे हैं।

शनिवार प्रातः 8:30 बजे शंकराचार्य महाराज काशी स्थित श्री विद्या मठ से 11 मार्च को लखनऊ में 'गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद' करने के लिये प्रस्थान करेंगे। यह जानकारी साझा करते हुए शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडे ने बताया कि शंकराचार्य महाराज श्री विद्या मठ से चलकर सर्वप्रथम चिंता गणेश मंदिर पहुंचेंगे, जहां विधिवत पूजन-अर्चन के पश्चात संकटमोचन मंदिर जाएंगे। वहां सामूहिक हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक तथा बजरंगबाण का पाठ होगा।

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