रायपुर , मार्च 19 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन गुरुवार को वीरता पुरस्कार, अपराध के आंकड़े और धर्म स्वातंत्र्य विधेयक जैसे मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान जहां सरकार ने वीरता पदक पाने वाले जवानों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी, वहीं कानून-व्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए। दूसरी ओर, धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए।

प्रश्नकाल के दौरान गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले जवानों और अधिकारियों को उनके संबंधित बल की ओर से एकमुश्त 20 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से उन्हें आजीवन 20 हजार रुपये मासिक भत्ता प्रदान किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रपति वीरता पदक और अन्य वीरता सम्मान प्राप्त करने वालों को निर्धारित आर्थिक सहायता दी जाती है, वहीं राज्य स्तर पर शौर्य पदक पाने वाले पुलिसकर्मियों को भी अलग से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाती है। राज्य के स्थायी निवासियों को, जो सेना, अर्धसैनिक बलों या अन्य सेवाओं में रहते हुए वीरता पुरस्कार प्राप्त करते हैं, उन्हें भूमि के बदले नकद अनुदान देने का प्रावधान भी लागू है।

इसी दौरान रायपुर संभाग में अपराध के मामलों को लेकर भी सरकार ने आंकड़े पेश किए। गृह मंत्री के लिखित जवाब के अनुसार, एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2025 के बीच हत्या के 510, दुष्कर्म के 1885, बलवा के 677, चोरी के 6293 और डकैती के 32 मामले दर्ज किए गए। सरकार ने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर कानून-व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सत्र के दौरान सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को लेकर देखने को मिली।

श्री शर्मा द्वारा विधेयक पेश किए जाने पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने दलील दी कि इस तरह के मामले पहले से ही उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं, ऐसे में जल्दबाजी उचित नहीं है। हालांकि, सत्ता पक्ष ने विधेयक को पूरी तरह विधिसम्मत बताते हुए विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया।

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रस्तावित कानून में कोई बाधा नहीं है। वहीं गृह मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि इस विषय पर शीर्ष अदालत की ओर से कोई रोक नहीं है और राज्य सरकार को कानून बनाने का पूरा अधिकार है।

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