जगदलपुर , मार्च 05 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक महिला किसान ने सब्जी की खेती और एकीकृत कृषि मॉडल अपनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई हैं। तीरथगढ़ गांव की अनीता कश्यप आज 'लखपति दीदी' के नाम से जानी जाती हैं, जिनकी वार्षिक आमदनी लाखों में है।

जिला पीआरओ से आज मिली जानकारी के अनुसार अनीता के पिता परदेशी राम के पास मात्र तीन एकड़ जमीन थी और परंपरागत खेती से परिवार का गुजर-बसर मुश्किल से होता था। आर्थिक तंगी के कारण अनीता को कुछ समय अपनी बड़ी बहन के घर भी रहना पड़ा। लेकिन साल 2022 में अनीता ने लाल हजारी स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी किस्मत बदलने का फैसला किया। समूह के माध्यम से उन्हें 'बिहान' योजना और एकीकृत कृषि परियोजना की जानकारी मिली, जिसके तहत महिलाओं को एकीकृत खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

शुरुआत में अनीता को पूंजी की कमी का सामना करना पड़ा, लेकिन योजना के तहत उन्हें चार हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड और दस हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि मिली। इसके बाद उन्होंने साठ हजार रुपये का बैंक लोन और परियोजना के तहत एक लाख पचास हजार रुपये का उद्यमी लोन प्राप्त किया। इस राशि से अनीता ने अपनी जमीन पर सब्जी उत्पादन के साथ-साथ मुर्गीपालन और ब्रीडिंग यूनिट भी शुरू की।

आज अनीता सब्जी की खेती से एक लाख पैंसठ हजार रुपये, मुर्गी पालन से दो लाख पचपन हजार रुपये और ब्रीडिंग यूनिट से पैंसठ हजार रुपये का सालाना उत्पादन कर रही हैं। इस तरह उनका कुल टर्नओवर लगभग पांच लाख रुपये तक पहुंच गया है। एक समय जो परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, वह आज खुशहाल जीवन जी रहा है।

अनीता कश्यप की सफलता की कहानी बताती है कि अगर सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं, तो छोटे किसान भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। अनीता अब दूसरी महिलाओं को भी एकीकृत खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं और उनका कहना है कि मेहनत और लगन से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है।

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