रायपुर, 19 फरवरी 2026 (वार्ता) छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग और क्रेडा के सचिव डॉ. रोहित यादव ने गुरूवार को यहां राज्य की ऊर्जा उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप का विवरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने "डबल इंजन, डबल एनर्जी" के विजन को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य सरकार बिजली उत्पादन क्षमता को दोगुना करने और वितरण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30,671.7 मेगावाट है। इसमें ताप विद्युत की हिस्सेदारी 28,824 मेगावाट, जल विद्युत की 220 मेगावाट और नवीकरणीय स्रोतों (सौर, बायोमास आदि) की हिस्सेदारी 2,047 मेगावाट है। केंद्र सरकार के 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य के अनुरूप, छत्तीसगढ़ अपनी निर्भरता नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ा रहा है।

राज्य को देश की "ऊर्जा राजधानी" बनाने के लिए 32,100 मेगावाट की नई परियोजनाओं के लिए एमओयू किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 12,100 मेगावाट ताप विद्युत, 4,200 मेगावाट परमाणु ऊर्जा, 2,500 मेगावाट सौर ऊर्जा और 13,300 मेगावाट पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसमें लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसमें एनटीपीसी और सतलज जल विद्युत निगम जैसी सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ अदाणी और जिंदल जैसे निजी समूह भी शामिल हैं। इसके अलावा, कोरबा और मड़वा में नई सुपर क्रिटिकल इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया भी जारी है।

आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत बस्तर क्षेत्र के 524 ऑफ-ग्रिड गांवों का विद्युतीकरण किया जाएगा। साथ ही, 150 नए उपकेंद्र और 12,000 वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाएंगे। रायपुर और बिलासपुर में बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड करने की योजना है, जिसकी लागत 10,700 करोड़ रुपये अनुमानित है। विभाग ने लगभग 500 डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती और 2027-28 तक बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने का भी लक्ष्य रखा है।

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