रायपुर , फरवरी 25 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन में दो अहम मुद्दों पर तीखी चर्चा देखने को मिली। एक ओर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के आंकड़ों में संशोधन को लेकर सरकार से जवाब-तलब हुआ, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए।

प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्वीकृत परियोजनाओं के आंकड़ों में बदलाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पहले 26 एसटीपी की जानकारी दी गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 21 बताया गया। बार-बार जवाब में बदलाव से भ्रम की स्थिति बन रही है। उन्होंने अधिकारियों पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की।

इस पर नगरीय प्रशासन मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने स्वीकार किया कि संशोधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक 12 नगरीय निकायों में 21 एसटीपी स्वीकृत हैं, जबकि 68 नगरीय निकायों में कुल 96 एसटीपी को मंजूरी दी गई है। मंत्री ने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इसी दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत प्रदेश में नशीले पदार्थों की बढ़ती अवैध बिक्री का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा।

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि राज्य में युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं और राजधानी सहित कई क्षेत्रों में प्रतिबंधित पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

गृह मंत्री विजय शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार छापेमारी और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब्ती और गिरफ्तारियां भी हुई हैं तथा प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर है।

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