नयी दिल्ली , दिसंबर 30 -- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 2024 के छत्तीसगढ़ में विस्फोटक आपूर्ति मामले में पांच लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है, जिनमें चार फरार आरोपी शामिल हैं।

यह मामला प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) आतंकवादी संगठन को विस्फोटकों की खरीद और आपूर्ति से संबंधित है।गिरफ्तार आरोपी मनीष सोढ़ी के साथ-साथ फरार आरोपी सोढ़ी केसा, मनीला, मडकम केसा और सोढ़ी लाखमा, जो सभी छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के निवासी हैं। एनआईए ने इनके खिलाफ आईपीसी, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूए(पी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मनीष सोढ़ी उर्फ हुर्रा को इस साल जुलाई में एनआईए ने गिरफ्तार किया था, और अब तक इस मामले में सात लोगों पर आरोपपत्र दायर हो चुका है।

एनआईए ने मंगलवार को जगदलपुर में एनआईए विशेष अदालत में दाखिल किए गए पूरक आरोपपत्र में इन पांचों आरोपियों का नाम लिया है, जो प्रतिबंधित संगठन के लिए विस्फोटकों और अन्य आपराधिक सामग्री की खरीद में सक्रिय रूप से शामिल पाए गए।

जांच में पाया गया कि ये पांचों आरोपी प्रतिबंधित संगठन के पीएलजीए बटालियन नंबर 01 के सदस्यों और सुकमा जिले के जगारगुंडा क्षेत्र में सक्रिय कैडरों द्वारा उपयोग के लिए विस्फोटक सामग्री के अवैध कब्जे में थे। माओवादियों ने इन सामग्रियों से सुरक्षा बलों के खिलाफ आईईडी तैयार करने की योजना बनाई थी, जैसा कि एनआईए की जांच में सामने आया है।

यह मामला मूल रूप से राज्य पुलिस द्वारा 25 सितंबर 2024 को दो आरोपियों, मंटोश मंडल और एस. नागार्जुन की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था। उनकी पूछताछ के आधार पर पुलिस ने विस्फोटक सामग्री, जिसमें टिफिन बम, डेटोनेटर, पोटैशियम नाइट्रेट और एल्यूमिनियम मेटल पाउडर शामिल हैं, के साथ-साथ पैकेजिंग रैपर, नक्सली साहित्य और मोबाइल फोन जैसी अन्य आपराधिक सामग्री जब्त की थी। मामले की आगे की जांच से आतंकवादी फंडिंग का निशान और जब्त सामग्री से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला का पता चला। एनआईए ने दिसंबर 2024 में स्थानीय पुलिस से मामला अपने हाथ में लिया था और जांच जारी रखे हुए है।

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