....पंकज शर्मा से....रायपुर , अप्रैल 15 -- छत्तीसगढ़ में तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास के बीच श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रदेश में बड़ी संख्या में पावर प्लांट और औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुई हैं, लेकिन इन इकाइयों में कार्यरत मजदूरों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक सेफ्टी उपकरण मिल रहे हैं या नहीं, यह अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।

मंगलवार को सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे ने वर्ष 2009 में बालको प्लांट में हुए दर्दनाक दुर्घटना की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें 240 मीटर ऊंची चिमनी गिरने से 40 श्रमिकों की मौत हो गयी थी।

प्रदेश में पूर्व में हुए प्रमुख औद्योगिक हादसों पर नजर डालें, तो वर्ष 2006 में बलौदाबाजार के रियल इस्पातप्लांट के डस्ट सेटलिंग चेंबर में विस्फोट से सात श्रमिकों की जान गयी थी। वर्ष 2025 में रायपुर के सिलतरास्थित गोदावरी स्टील प्लांट में छत गिरने से छह श्रमिकों की मृत्यु हुई। वर्ष 2024 में सरगुजा के एलुमिनियमप्लांट में कोयले से भरा बेल्ट गिरने से चार श्रमिकों की मौत हुई।

इसके अलावा हाल के वर्षों में कई छोटे-बड़े हादसे लगातार सामने आए हैं। फरवरी 2026 में रायगढ़ के मंगल कार्बन फैक्ट्री में विस्फोट के बाद दो श्रमिकों और एक बालिका की मौत हुई। मार्च 2026 में बलौदाबाजार के स्वदेश मेटालिक प्लांट में 30 फुट ऊंचाई से गिरने पर एक श्रमिक की जान गयी। जून 2025 में भिलाई स्टील प्लांट में 1000 किलोग्राम वजनी जंबो बैग गिरने से एक महिला श्रमिक की मौत हुई। मई 2024 में बेमेतरा स्थित स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड फैक्ट्री में विस्फोट में एक व्यक्ति की मृत्यु और छह लोग घायल हुए। अप्रैल 2026 में बीएसपी में टर्बाइन में आग लगने से सात कर्मचारी घायल हुए, जिनमें कई श्रमिकों ने कूदकर अपनी जान बचायी।

विधानसभा में मार्च माह में दी गयी जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में 296 श्रमिकों की मृत्यु हुई है, जबकि 248 घायल हुए हैं। राज्य के उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया था कि प्रदेश में कुल 7,324 कारखाने संचालित हैं, जिनमें से 948 'खतरनाक' और 32 'अत्यंत खतरनाक' श्रेणी मेंआते हैं। सरकार की ओर से सुरक्षा मानकों, पीपीई किट और आवश्यक सुविधाओं को अनिवार्य बताया गया है।

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