रायपुर , दिसंबर 30 -- छत्तीसगढ़ के उत्तरी और मध्य हिस्सों में चल रही शीतलहर के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सरगुजा अंचल और मैनपाट में रात के समय ओस की बूंदें जमकर बर्फ में तब्दील हो गईं, जिससे इलाके में जबरदस्त ठिठुरन हो रही है।
राज्य के मैनपाट में रात का न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, वहीं प्रदेश के कई शहरों में तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री तक नीचे गिर गया है। दुर्ग में न्यूनतम तापमान औसत से 5.3 डिग्री कम रहा, जबकि रायपुर में यह गिरावट 4.2 डिग्री तक दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में शीतलहर चल सकती है। पिछले 24 घंटों में अंबिकापुर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं जगदलपुर में अधिकतम तापमान सबसे अधिक 29.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है।
कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों और नवजातों पर देखने को मिल रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर तेजी से ठंड खोता है, जिससे वे ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात शिशुओं, विशेषकर सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है। कई मामलों में बच्चों को एनआईसीयू और एसएनसीयू में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। ठंड के कारण वायरल फीवर, सर्दी और खांसी के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग की ओपीडी में रोजाना 600 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि कुल ओपीडी में प्रतिदिन 2000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है और समय पर इलाज न मिलने पर अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
शीतलहर के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू की है। निगम की ओर से रातभर अलाव जलाने और उसकी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बेघर और जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके।
वहीं स्वास्थ्य विभाग ने परामर्श जारी कर लोगों से अपील की है कि अत्यधिक ठंड में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें और बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
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