रायपुर , मार्च 27 -- छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल मचाने वाले कथित 1,500 करोड़ रुपये के लेनदेन वाले वायरल वीडियो का सच अब सामने आ चुका है। पुलिस की विस्तृत जांच और अदालत में पेश चार्जशीट ने इस पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है, जिसमें एआई तकनीक का इस्तेमाल कर राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
इस कहानी की शुरुआत होती है असलम मिर्जा से, जिसे पुलिस ने इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड करार दिया है। असलम ने अपने पुराने साथी अंकित दुबे और जावेद के साथ मिलकर इस शाजिश की पहल की।
कॉलेज के दिनों की दोस्ती ने इस साजिश को आकार दिया। अंकित दुबे का संपर्क आकाश जोशी से था, जो सीएमओ में सोशल मीडिया का काम देख चुका था और "रणनीति" नाम की मीडिया फर्म चलाता था। पुलिस जांच में सामने आया कि आकाश का करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ था और इसी नाराजगी ने उसे सिस्टम के खिलाफ काम करने के लिए प्रेरित किया।
योजना के तहत आकाश, अंकित को भाजपा विरोधी कंटेंट भेजता था। अंकित उस कंटेंट को एडिट कर जावेद तक पहुंचाता और जावेद एआई टूल्स की मदद से उसे वीडियो का रूप देता। इसके बाद वही वीडियो फिर अंकित के पास लौटता और टेलीग्राम के जरिए असलम मिर्जा तक पहुंचता जो उसे वायरल करने का काम करता था। इस पूरी कड़ी में यश डागा ने भी अहम भूमिका निभाई।
इस बीच एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब असलम ने अंकित से पूछा कि वह खुद को भाजपा समर्थक बताने के बावजूद भाजपा विरोधी कंटेंट क्यों भेज रहा है। तब अंकित ने खुलासा किया कि वह आकाश जोशी के लिए काम कर रहा है, जो पहले भाजपा आईटी सेल से जुड़ा हुआ था।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब 19 दिसंबर 2025 को विधायक पुरंदर मिश्रा ने सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, ओपी चौधरी, अजय जामवाल, पवन साय और राम गर्ग जैसे बड़े नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
वायरल वीडियो में नितिन नबीन के नाम पर 1,500 करोड़ रुपये के कथित कलेक्शन की बात कही गई थी, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया था। सोशल मीडिया पर कई इंफ्लुएंसर्स ने भी बिना सत्यापन के इस वीडियो को शेयर कर मामले को और भड़का दिया।
हालांकि, पुलिस की जांच में साफ हो गया कि वीडियो पूरी तरह फर्जी था और तथ्यों से इसका कोई लेना-देना नहीं था। जांच एजेंसियों ने डिजिटल साक्ष्यों-मोबाइल, चैट्स और पेन ड्राइव-के आधार पर पूरी साजिश को उजागर किया।
पुलिस का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं थी। आरोपियों ने इससे पहले भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर इसी तरह के भ्रामक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए थे। फिलहाल सभी पांचों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई अदालत में जारी है।
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