दंतेवाड़ा , दिसंबर 30 -- छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल क्षेत्र में आर्सेलर मित्तल निप्पोन स्टील इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के आयरन ओर बेनीफिशिएशन प्लांट की क्षमता आठ से बढ़ाकर 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष किए जाने के प्रस्ताव को लेकर आयोजित पर्यावरण स्वीकृति की लोक सुनवाई दिनभर चली।

इस जन सुनवाई में भारी संख्या में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी रही, लेकिन पूरी प्रक्रिया विरोध, असंतोष और अव्यवस्थाओं के कारण विवादों में घिरती नजर आई।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट राजेश पात्रे ने बताया- "लोक सुनवाई के उपस्थिति पत्रक में लगभग 700 लोगों ने हस्ताक्षर किए, जबकि 49 लोगों ने मौखिक रूप से अपने विचार रखे, विचार व्यक्त करने के दौरान कई वक्ताओं ने तीखी टिप्पणियां कीं। वहीं 20 लोगों ने लिखित रूप में सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।"लोक सुनवाई के दौरान की गई मंच व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में खासा आक्रोश देखा गया। मंच को अत्यधिक ऊंचाई पर बनाया गया था, जहां अपर कलेक्टर और पर्यावरण मंडल के अधिकारी लोहे की जाली के भीतर बैठे थे, जबकि जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जाली के बाहर खड़े होकर माइक के माध्यम से अपनी बात रखने को विवश थे। इस व्यवस्था से लोग स्वयं को अपमानित महसूस करते नजर आए।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तूलिका कर्मा ने इस व्यवस्था पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे ''लोक सुनवाई नहीं बल्कि अकबर का दरबार'' बताया और नाराज होकर सुनवाई स्थल से बाहर चली गईं। कड़पमाल के सरपंच ने कहा कि पहाड़, जंगल, जमीन और पानी पर पहला अधिकार आदिवासियों का है, लेकिन बीते 60 वर्षों से आदिवासी प्रदूषण, धूल और लाल पानी पीने को मजबूर हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित