रायपुर , फरवरी 08 -- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज आरोप लगाया कि प्रदेश की पूर्व कांग्रेस सरकार ने माओवादी आतंक को संरक्षण दिया।

श्री शाह ने रायपुर में आयोजित ऑर्गनाइजर के कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि वे भूपेश बघेल के कार्यकाल में भी केंद्रीय गृह मंत्री थे और पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह सकते हैं कि उस समय माओवादी गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण मिला।

उन्होंने कहा कि किसी भी शासन द्वारा हथियारबंद समूहों को प्रश्रय देना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के भी खिलाफ है।

श्री शाह ने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित 'छत्तीसगढ़ @25 : शिफ्टिंग द लेंस' कार्यक्रम में कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल स्वयं विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, बल्कि यह विकसित भारत @2047 के लक्ष्य का शुभंकर बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि राज्य ने पिछले 25 वर्षों में जिस तरह प्रगति की है, वह आने वाले वर्षों में दोगुनी गति से आगे बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि ''विकसित छत्तीसगढ़'' केवल एक नारा नहीं है, बल्कि स्पष्ट विचारधारा, सुशासन और सतत विकास की 25 वर्षों की यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कभी छोटे राज्यों को लेकर आशंकाएं जताई जाती थीं, लेकिन छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड ने यह सिद्ध कर दिया कि स्पष्ट नीति और मजबूत नेतृत्व के साथ छोटे राज्य भी विकास का मॉडल बन सकते हैं।

उन्होंने बताया कि जब छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का आंदोलन चल रहा था, तब यह क्षेत्र संयुक्त मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के कारण विकास से वंचित था। भोपाल से 500 किलोमीटर से अधिक दूरी और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते इस अंचल के साथ न्याय संभव नहीं हो पा रहा था। यह किसी मुख्यमंत्री की असफलता नहीं, बल्कि व्यवस्था की सीमाएं थीं।

गृह मंत्री ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छोटे राज्यों के निर्माण को प्रयोग नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति माना। इसी विचारधारा के आधार पर मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़, बिहार से झारखंड और उत्तरप्रदेश से उत्तराखंड का गठन किया गया, जो आज एक-दूसरे के पूरक बनकर देश के विकास में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कांग्रेस शासन में हुए आंध्रप्रदेश-तेलंगाना विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां विभाजन के दौरान लोकसभा में सांसदों को बाहर निकालकर कानून पारित किया गया, जिससे दोनों राज्यों के बीच वर्षों तक कटुता बनी रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीति में विचारधारा का कितना महत्व है।

श्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने 25 वर्षों में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। राज्य का वार्षिक बजट 30 गुना, प्रति व्यक्ति आय 17 गुना और सकल राज्य घरेलू उत्पाद 25 गुना बढ़ा है। आर्थिक प्रगति के सभी 16 प्रमुख संकेतकों में राज्य ने उल्लेखनीय सुधार किया है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंचाई क्षमता दोगुनी हुई है। खरीफ उत्पादन तीन गुना और रबी उत्पादन लगभग छह गुना बढ़ा है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार हुए हैं। जिला अस्पतालों की संख्या सात से बढ़कर 30, मेडिकल कॉलेज 1 से बढ़कर 16 हो गए हैं। कुपोषण, मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।

आदिवासी कल्याण पर बोलते हुए गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की साक्षरता दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। जहां पहले एक भी एकलव्य आवासीय विद्यालय नहीं था, आज 75 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में यदि किसी राज्य ने सर्वश्रेष्ठ आदिवासी कल्याण किया है, तो वह छत्तीसगढ़ है।

श्री शाह ने माओवादी समस्या पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि पूरी तरह विचारधारा आधारित चुनौती है। उन्होंने कहा कि संविधान बंदूक की राजनीति की अनुमति नहीं देता।

उन्होंने दोहराया कि सरकार किसी पर गोली नहीं चलाना चाहती। हथियार छोड़ने वालों के लिए आत्मसमर्पण नीति के तहत सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था है। उन्होंने आदिवासी युवाओं से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें।

गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 31 मार्च 2026 से पहले देश को माओवादी समस्या से मुक्त करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का 25 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड यह साबित करता है कि आने वाले 25 वर्षों में राज्य देश के अग्रणी विकसित राज्यों में शामिल होगा।

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