बीजापुर , फरवरी 01 -- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत बीजापुर जिले की ग्राम पंचायत जांगला में विकसित कालोनी आधारित आवास मॉडल ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। इसी के मद्देनजर असम राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इस मॉडल का अध्ययन करने के लिए जांगला का दौरा किया।

रविवार को जिला पीआरओ से मिली जानकारी के मुताबिक,असम के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ज्वाइंट कमिश्नर ध्रुब ज्योति नाथ ने किया, जिनके साथ वरिष्ठ अधिकारी रंजीत दास एवं निलोत्पल मिश्रा भी थे। छत्तीसगढ़ राज्य से उपायुक्त राजेंद्र पाण्डेय एवं अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बस्तर की समृद्ध परंपरा का सम्मान करते हुए अतिथियों का गौर सिंग पहनाकर तथा पारंपरिक गीतों से स्वागत किया, जिससे प्रतिनिधिमंडल काफी प्रभावित हुआ।

प्रतिनिधिमंडल ने पीएमएवाई-जी के अंतर्गत निर्मित 120 आवासों की कालोनी का सूक्ष्म निरीक्षण किया। अधिकारियों ने इसके सुव्यवस्थित लेआउट, चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया और बेहतर योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रारूप से न केवल बुनियादी ढांचे की सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकती हैं, बल्कि लाभार्थियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास भी मिलता है। अधिकारियों ने निर्माण में अपनाई गई तकनीकी मानकों, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और प्रभावी निगरानी व्यवस्था को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया।

असम के ज्वाइंट कमिश्नर ध्रुब ज्योति नाथ ने कहा, "जांगला मॉडल यह प्रमाणित करता है कि सही नियोजन और प्रभावी निगरानी से सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर ठोस परिवर्तन ला सकती हैं। कालोनी आधारित दृष्टिकोण से निर्माण गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है, साथ ही सामाजिक समरसता को भी बल मिला है।"दौरे के दौरान, अतिथि अधिकारियों ने पास की ही ग्राम पंचायत सकनापल्ली में 'प्रोजेक्ट उन्नति' के तहत आर-सेटी माध्यम से राजमिस्त्री का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लाभार्थियों से भी बातचीत की। उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता और इससे उत्पन्न हो रहे रोजगार के अवसरों की जानकारी ली। लाभार्थियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से न केवल स्थानीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।

इस अवलोकन का मुख्य उद्देश्य जांगला के इस सफल मॉडल से सीख लेकर असम में भी इसे लागू करने की संभावनाएं तलाशना है, ताकि वहां भी आवास निर्माण को गति व गुणवत्ता प्रदान की जा सके।

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