रायपुर , मार्च 17 -- छत्तीसगढ़ मेंं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ आक्रामक मोर्चा खोलते हुए प्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को विधानसभा भवन का घेराव कार्यक्रम किया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज समेत तमाम वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल हुए।
कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के साथ किए गए इस घेराव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर जमकर निशाना साधा।
विधानसभा घेराव शुरू करने से पहले शंकर नगर स्थित भारत माता चौक पर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया, जहां हजारों की संख्या में एकत्र कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस सभा को संबोधित करते हुए श्री पायलट ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार विदेशी ताकतों के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध विराम की घोषणा करते हैं और रूस से तेल खरीदने की अनुमति देते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज का भारत कहां से और कितना तेल खरीदेगा, यह दूसरे देश तय कर रहे हैं। यदि अटल बिहारी वाजपेयी आज प्रधानमंत्री होते तो ऐसा नहीं हो रहा होता।"प्रदेश प्रभारी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार गरीबों और मजदूरों के हितैषी कानूनों को खत्म कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच मनरेगा जैसे कानूनों के प्रति सही नहीं रही। उन्होंने मनरेगा में बड़े बदलाव करके मजदूरों के साथ भारी अन्याय किया है। हमने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून और शिक्षा का अधिकार दिया था, जिसे यह सरकार कमजोर कर रही है।" श्री पायलट ने विश्वास जताया कि 2028 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनेगी और 2029 में दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की केंद्र सरकार होगी।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधानसभा के बहिष्कार और घेराव की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य की भाजपा सरकार गरीबों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, "विधानसभा में गरीबों की बात सुनने वाला कोई नहीं है। यह सरकार केवल पूंजीपतियों के हितों की रक्षा कर रही है। कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो गरीबों के साथ खड़ी है और उनके लिए लड़ती है। चूंकि सदन में हमारी बात नहीं सुनी जा रही थी, इसलिए हमने आज का सत्र बहिष्कार कर विधानसभा घेराव का रास्ता चुना है।"पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने विदेश नीति के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, "आज भारत की विदेश नीति की धज्जियां उड़ रही हैं। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय फंसे हुए हैं लेकिन सरकार के पास उनकी सुरक्षित वापसी का कोई प्लान नहीं है।" उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के विदेश नीति पर लिखे गए लेख का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सोच और नीतियों की विश्व स्तर पर चर्चा हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल रही है। श्री बघेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस विरोध को 'नशा और अन्याय के विरुद्ध युद्ध' बताया।
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