रायपुर, दिसंबर 15 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने सोमवार को आवास एवं पर्यावरण विभाग की बीते दो वर्षों का ब्यौरा मीडिया के सामने रखा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते दो वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर के समग्र विकास की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के चलते नवा रायपुर आज राष्ट्रीय स्तर पर एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य उन्मुख शहर के रूप में उभर रहा है।

मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को देश का पहला ऋण-मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बनाया गया है। प्राधिकरण द्वारा पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से जुड़े 1,345 करोड़ रुपये के संपूर्ण ऋण का भुगतान कर दिया गया है, जिससे लगभग 5,030 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि और संपत्तियां गिरवी-मुक्त हुई हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 132 एकड़ क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 2,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। इस परियोजना से 12,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

आईटी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 1,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावित हैं। उन्नत 5जी और 6जी तकनीक आधारित इस पहल से नवा रायपुर को टेक-हब के रूप में नई पहचान मिलेगी और करीब 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।

मंत्री ने बताया कि नवा रायपुर को मेडिकल हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मेडिसिटी परियोजना पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 300 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही एनआईएफटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना से शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

आवास क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम-2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और नागरिकों तथा डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा रियल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे औद्योगिक उत्सर्जन पर सतत निगरानी संभव हुई है। उत्सर्जन सीमा पार होने पर त्वरित अलर्ट और कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।

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