बिलासपुर , अप्रैल 23 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। न्यायालय ने पूर्व सेवा गणना को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी।

दरअसल, पूरा मामला चिरमिरी नगर निगम में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल से जुड़ा है। उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल किया जाए। याचिका में कहा गया था कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में नहीं जोड़ा जा रहा है जो उनके साथ अन्याय है।

मामले में पहले न्यायालय की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार करे। इसके लिए सरकार को 120 दिनों का समय भी दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार ने इस निर्देश पर अमल करने के बजाय सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील दायर की।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने संविलियन की शर्तों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पेंशन का निर्धारण उन्हीं शर्तों के आधार पर किया जाना चाहिए, जो संविलियन के समय तय की गई थीं। हालांकि, न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

डबल बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब संविलियन के दौरान पूर्व सेवा की गणना को मान्यता दी गई है, तो उसे पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है। अंततः उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया।

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