तिरुवनंतपुरम , फरवरी 08 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने प्रख्यात बुद्धिजीवियों प्रोफेसर अमर्त्य सेन, प्रोफेसर रोमिला थापर, डॉ. शकुंतला थिल्स्टेड, फारूक अब्दुल्ला और कनिमोझी से 15 फरवरी को केरल सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे 'अंतरराष्ट्रीय विकास एवं लोकतंत्र सम्मेलन' में अपनी भागीदारी पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
श्री चेन्निथला ने सम्मेलन के आमंत्रित वक्ताओं को लिखे एक खुले पत्र में कहा कि वह यह पत्र किसी दलगत नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक चिंतित नागरिक और विधायक के रूप में लिख रहे हैं जो लंबे समय से उनके विद्वतापूर्ण योगदान, सार्वजनिक भूमिका और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में सम्मेलन में इन हस्तियों की भागीदारी की जानकारी आने के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से यह आग्रह करना पड़ा, क्योंकि उनके नैतिक और बौद्धिक प्रभाव के कारण इस कार्यक्रम को विशेष महत्व मिल रहा है।
श्री चेन्निथला ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे सम्मेलन लोकतंत्र को सशक्त करने वाले होते हैं, लेकिन केरल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति असामान्य है। मार्च 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और ऐसे में यह सम्मेलन एक अकादमिक आयोजन से अधिक सत्तारूढ़ सरकार को नैतिक वैधता दिलाने का प्रयास प्रतीत होता है, जो लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं, संस्थागत ईमानदारी और जवाबदेही के मुद्दों पर आलोचनाओं का सामना कर रही है।
उन्होंने आशंका जतायी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों की उपस्थिति को सरकार के पक्ष में समर्थन के रूप में प्रचारित किया जा सकता है और चुनिंदा उद्धरणों और तस्वीरों के जरिए यह संदेश दिया जा सकता है कि विश्व के अग्रणी विचारक सरकार के विकास और लोकतंत्र संबंधी दावों से सहमत हैं।
श्री चेन्निथला ने कहा कि हाल के वर्षों में केरल में असहमति को लोकतांत्रिक अधिकार की बजाय खतरे के रूप में देखा जाने लगा है। उन्होंने 2020 में केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118ए के प्रस्ताव और बाद में उसके विरोध के बाद वापस लिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आलोचना को दबाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आलोचकों और कार्यकर्ताओं पर कानूनी व प्रशासनिक दबाव बढ़ा है तथा भव्य आयोजनों और नियंत्रित नैरेटिव के जरिए शासन की अच्छी तस्वीर दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। श्री चेन्निथला ने मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं, सहकारी क्षेत्र से जुड़े विवादों और कानून-व्यवस्था से संबंधित आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों ने सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित