, Dec. 10 -- भाजपा के रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि मतदाता कौन होगा यह चुनाव आयोग को ही तय करना होता है। चुनाव आयोग को चुनाव कराने का संविधान ने अधिकार दिया है और वह नियम के अुनसार जो चाहे करे लेकिन निष्पक्ष चुनाव कराए तो फिर दिक्कत क्यों रही है। उनका कहना था कि यदि मतदान प्रक्रिया गलत है तो कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने बिहार में इस मामले में एक भी शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार को लेकर पहले कई बार समितियों का गठन हुआ है और इन सब समितियों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं और जिनके आधार पर चुनाव में सुधार हुए हैं। इधर चुनाव फंडिंग पर सरकार बांड लेकर आई और उच्चतम न्यायालय ने उस पर अपनी व्यवस्था दी है जिसका सबने सम्मान किया है। न्यायालय ने व्यवस्था दी थी कि स्टेट बैंक में इसके लिए खाता खुलेगा और बांड का सारा पैसा उसमें आएगा और चुनाव सुधार की यह पहली महत्वपूर्ण व्यवस्था थी। उनका यह भी कहना था कि चुनाव में पैसा खर्च होता है और पार्टियों को इसके लिए पैसा चाहिए होता है लेकिन राजनीतिक दलों को उसकी साख पर पैसा मिलता है। उनका कहना था कि कई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को भी चुनावी बांड के जरिए बहुत पैसा मिला है और यह सारा पैसा बैंक में उस पार्टी के नाम से जमा हुआ है।

तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी रॉय ने एसआईआर को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार यह काम अपने फायदे के लिए कर ही है इसीलिए वह चुनाव से ठीक पहले एसआईआर करवा रही है। बिहार में 65 लाख वोटर हटाए गये हैं। उनका कहना था कि बिहार चुनाव में कोई पार्टी जीती या हारी नहीं है और अगर जीता है तो सिर्फ चुनाव आयोग ही जीता है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ मनमानी कर रही है और वह न्यायपालिका तथा चुनाव आयोग सभी संस्थाओं को शक्तिहीन कर रही है। आयोग ने एसआईआर का काम तीन महीने में पूरा करने का समय दिया है और काम के दबाव में इसमें लगे बीएलओ आए दिन आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन सरकार इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। बंगलादेश के लोगों और रोहिंग्या मुसलमानों के भारत में घुसने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि वे अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में आ रहे हैं तो इसके लिए जिम्मेदार भारत सरकार का गृह मंत्रालय है जो अवैध घुसपैठ को नहीं रोक पा रहा है।

समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए लेकिन ऐसा लगता है कि आयोग पूरी तरह से सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में चुनाव को लेकर कई शिकायतें आयोग से की हैं लेकिन आयोग ने विपक्ष की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर नागरिकता कानून को लागू किया जा रहा है और इसके माध्यम से मतदाताओं को मतदान के अधिकार से महरूम किया जा रहा है। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है लेकिन बीएलओ को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है और उनसे अधिक काम लिया जा रहा है जिसके कारण प्रदेश में कई बीएलओ ने आत्महत्या की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसी राज्य में चुनाव हो रहे हैं तो उस दौरान सरकार मतदाताओं के बैंक खातों में पैसा नहीं डाल सकती है लेकिन ऐसा हुआ है और यह निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए किसी भी तरह से उचित नहीं है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एसआईआर आयोग का संवैधानिक अधिकार है। एसआईआर की प्रक्रिया इस समय 12 राज्यों में चल रही है। विपक्ष का इसे जल्दबाजी में कराए जाने के आरोप को गलत बताते हुए उन्होंने कहा कि कि जिन राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है उनमें से कई राज्यों में विधानसभा चुनाव एक या दो साल बाद होने हैं इसलिए एसआईआर को लेकर जल्दबाजी का आरोप आधारहीन है। उन्होंने घुसपैठियों को राष्ट्र के लिए खतरा बताया और कहा कि फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आयोग ईमानदार प्रयास कर रहा है और फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनाकर मतदान करने वाले लोगों के नाम हटाने का आयोग का काम सराहनीय है।

कांग्रेस की प्रोफेसर वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है लेकिन वह ऐसे कदम उठा रहा है जिससे उसकी साख पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आयोग पर सरकार के साथ षडयंत्र करने का आरोप लगाया और कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने लाखों नये मतदाताओं के नाम जोड़े हैं। चुनाव आयोग लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर पा रहा है और सरकार के इशारे पर मनमानी कर रहा है। डीएमके के टीएम सेल्वा गणपति ने कहा कि एसआईआर अवैध है और चुनाव आयोग को इस तरह का आदेश नहीं देना चाहिए। इससे असंख्य लोगों को वोट के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

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