, Dec. 10 -- कांग्रेस की वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने कहा कि सरकार भले ही कांग्रेस मुक्त भारत की बात करे लेकिन जो मुद्दे नेता विपक्ष राहुल गांधी उठाते हैं सरकार को उस पर अपना फैसला पलटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज 'वोट चोरी' और एसआईआर का मुद्दा सदन में उठाया जा रहा है उसे भी एक दिन स्वीकार किया जायेगा। चुनाव सुधार तभी संभव होगा जब इसको लागू करने वाले निष्पक्ष होगा। चुनाव आयोग संवैधानिक संस्थान है लेकिन इसका चाल,चरित्र, चेहरा बदल चुका है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव षड़यंत्र के तहत तीन महीने आगे बढाया गया था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता संदेहास्पद है और उसका जो काम है वह नहीं कर रही है। चुनाव आयोग लोकतंत्र का चीर हरण करने का काम कर रही है।
विदुथलई चिरूथईगल काची (वीसीके) के डा थोल तिरूमावलवन ने कहा कि एसआईआर के माध्यम से नागरिकता की जांच की जा रही है जबकि चुनाव आयोग को इस प्रकार का काम करने का अधिकार नहीं है। चुनाव आयोग लोगों से मतदाता का अधिकार छीनने का काम कर रही है। बिहार में आयोग ने चालीस लाख लोगों को मतदाता सूची से नाम निकाल दिया गया है। हालांकि सभी भारतीय हैं फिर भी उनके मताधिकार छीनकर नागरिकता के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है और इसे निष्पक्ष कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है लेकिन चुनाव आयोग सत्तारुढ दल के इशारे पर कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में एक करोड़ लोगों के मतदाता का नाम मतदाता सूची से काटे जाने की आशंका है लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने ईवीएम को हटाने और फिर से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की।
भाजपा की कंगना रनौत ने कहा कि पिछले एक साल से विपक्ष का रवैया बहुत निराश करने वाला रहा है। एसआईआर के नाम पर विपक्ष ने बहुत हंगामा लेकिन जब सदन में इस पर चर्चा हो रही है वे लोग इधर उधर की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ईवीएम हैक नहीं करते है वह लोगों की दिलों को हैक करते हैं। विपक्ष के लोग भूल गये कि एक समय वोट के बक्से उठा लिये जाते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी संविधान और कानून व्यवस्था का सम्मान नहीं किया है। एसआईआर की वजह से लोगों में उत्साह बढा और बिहार की जनता ने मतदान में बढचढ कर हिस्सा लिया। उन्होंने एक राष्ट्र एक चुनाव कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे लोग असुविधा से बचेंगे और पैसे की भी बचत होगी।
नेशनल कांफ्रेस के मियां अल्ताफ अहमद कहा कि हमारे चुनाव प्रक्रिया पर पहले कभी उंगली नहीं उठाई गयी थी लेकिन अब चुनाव आयोग के क्रियाकलापों पर सवाल उठ रहे है। सरकार और आयोग की जिम्मेदारी है कि जो भी संदेह है उसे दूर करें। राजनीतिक व्यवस्था पर जिस प्रकार के आरोप लग रहे हैं उससे एक अच्छी व्यवस्था नहीं बन सकती है। हमें हर वह कदम उठाना चाहिए ताकि चुनाव प्रक्रिया पर कोई संदेह नहीं रहे। विपक्ष के सभी सुझावों पर गौर करना चाहिए। बिहार चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में दस दस हजार रूपये भेजना अच्छी परंपरा नहीं है। इससे हमारे लोकतंत्र को नुकसान होगा।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के विजय कुमार हंसदक ने कहा कि नेता विपक्ष ने मतदान प्रक्रिया को लेकर कई प्रकार के सवाल उठाये लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी महंगाई जैसे अहम मुद्दे पीछे छोड़कर वंदेमातरम पर चर्चा करायी जाती है। चुनाव का क्या मतलब रह जायेगा जब पूरी व्यवस्था को ही कब्जे ले लिया जायेगा। देश के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने कहा कि एसआईआर के माध्यम से व्यवस्थित वोट की हेराफेरी की गयी। बिहार में एसआईआर में एक भी घुसपैठिया नहीं मिला जबकि सत्ता में बैठे बड़े नेता खुले मंच से घुसपैठिये की बात करते थे। सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों को माफी मांगनी चाहिए जिन्होंने सीमांचल में घुसपैठिये की बात की थी। बिहार में बीस साल से मौजूद एनडीए की सरकार ने राज्य को हर क्षेत्र में पीछा रखा लेकिन उसके बाद जिस प्रकार के नतीजे आये वे चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा वोट चोरी कराकर सरकार बनाती है। उन्होंने ईवीएम के स्थान पर बैलेट से मतदान कराने का आग्रह किया। वोट चोरी रोकना चाहिए वरना लोकतंत्र नहीं बचेगा।
एनसीपी के सुनील दत्तात्रेय तटकरे ने कहा कि बाबा साहब से देश वासियों को सबसे सशक्त संविधान दिया और सभी को एक मत देने का अधिकार दिया। कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही लेकिन कभी उसके चुनाव पर कभी किसी ने सवाल नहीं उठाया लेकिन अब बेबुनियाद आरोप लगाये जा रहे हैं। वर्ष 2004 और 2009 में दो बार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार बनी और तब भी ईवीएम से चुनाव हुआ था लेकिन अब विपक्ष के लोग ईवीएम पर सवाल उठा रहे है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की एनडीए से अधिक सीटें आयी तब ईवीएम पर सवाल नहीं उठाये। विधानसभा में हारने के बाद ईवीएम का मुद्दा उठा रहे हैं यह सही नहीं है। विकसित भारत की तरफ देश बढ रहा है इसलिए कांग्रेस के लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया लगातार सुधार के रूप में चली आ रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने की उम्र 25 साल की जगह 21 साल किया जाना चाहिए क्योंकि मतदान करने की उम्र अठारह साल है। अगर हम विकसित भारत चाहते हैं तो हमें चुनावी प्रक्रिया में बहुत सुधार करने की आवश्यकता है। एसआईआर पर प्रश्न चिन्ह न लगाकार प्रत्येक नागरिक को इसमें शामिल होना चाहिए। एक देश एक चुनाव भी चुनावी प्रक्रिया में एक बड़ा सुधार के रूप आने वाला है।
सीपीआई के के सुब्बारायण ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में सत्ता को लेकर लोगों में अच्छी भावना नहीं है। विपक्ष के नेता ने सवाल पूछा है उसे सत्ता पक्ष को जवाब देना चाहिए। सरकार की नीयत अगर साफ थी तब क्यों चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हटाया गया। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते हैं वह एक खास विचारधारा के तहत काम कर रही है।
सीपीआई (एमएल) के सुदामा प्रसाद ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया वैधानिक नहीं है इस पर तत्काल रोक लगाया जाए। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर तत्काल रोक लगायी जाए और बैलेट पेपर से चुनाव करायी जाय। सरकार ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाली समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है। बिहार विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार की गड़बड़ियां हुई है उसकी जांच करायी जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने बिहार में सत्तर लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे हैं उन्हें बताना चाहिए कि कितने घुसपैठिये मिले।
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