कोलकाता , अप्रैल 07 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के लिए मतदाता सूची को सोमवार की मध्यरात्रि अंतिम रूप दिया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि समयसीमा के बाद न्यायाधिकरण के आदेश से जोड़े गये नाम पहले चरण में मतदान के योग्य नहीं होंगे।
मतदाता सूची को अंतिम रूप दिये जाने के साथ ही सूची से हटाये गये 27,16,393 लोगों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। आयोग के अनुसार संशोधन प्रक्रिया के दौरान लगभग 60 लाख नामों की जांच की गयी, जिनमें से 32,68,119 लोगों को योग्य पाकर सूची में रखा गया, जबकि 27,16,393 लोगों को अपात्र घोषित कर हटाया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित व्यक्ति न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं, लेकिन उनके नाम बाद में शामिल होने पर भी वे पहले चरण में मतदान नहीं कर सकेंगे।
यह प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत चल रही है। प्रस्तावित 19 न्यायाधिकरणों में से फिलहाल केवल छह का ढांचा तैयार हो पाया है, जिससे प्रक्रिया की गति को लेकर चिंता बनी हुई है। उच्चतम न्यायालयने कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि तीन पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति गठित कर सभी न्यायाधिकरणों के लिए एक समान कार्यप्रणाली तय की जाये। यह दिशा-निर्देश सभी न्यायाधिकरणों पर बाध्यकारी होंगे।
आयोग ने कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराना उसकी प्राथमिकता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वे स्वयं संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा करेंगे, विशेषकर उन इलाकों का जहां पिछले चुनावों में हिंसा हुई थी।
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