नयी दिल्ली , जनवरी 27 -- चुनाव आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल सरकार को मतदाता सूची तैयार करने के लिए पर्यवेक्षकों के रूप में कार्यरत भारतीय पुलिस सेवा (आईएएस) के तीन अधिकारियों के तबादलों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने कहा है कि राज्य सरकार का यह कदम मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए जारी स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में आयोग ने कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े किसी भी अधिकारी को पुनरीक्षण अवधि के दौरान स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। इस संबंध में स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद, अधिकारियों का तबादला उसकी पूर्व स्वीकृति के बिना किया गया था।

आयोग ने पत्र में कहा है, "आयोग के संज्ञान में आया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आयोग की पूर्व सहमति के बिना मतदाता सूची के पर्यवेक्षकों के विभागीय तबादले/नियुक्तियां करने का आदेश दिया है, जो आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है।"‎आयोग ने राज्य सरकार से तबादलों के आदेश तत्काल रद्द करने को कहा है और चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे कोई भी आदेश जारी करने से पहले उससे (आयोग) स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है।

इस पत्र के अनुसार, चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर, 2025 को एक पत्र के माध्यम से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की थी। उस पत्र के अनुच्छेद चार में मुख्य सचिवों के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि एसआईआर के काम में लगे अधिकारियों का तबादला आयोग की सहमति के बिना न किया जाए।

इसके बाद, नवंबर 2025 के अंत में जारी एक अन्य पत्र के माध्यम से, आयोग ने मतदाता सूची के पर्यवेक्षकों के साथ-साथ पांच संभागीय आयुक्तों की नियुक्ति की। इन अधिकारियों को इस प्रक्रिया की अवधि के लिए चुनाव आयोग में "मानित प्रतिनियुक्ति" पर रखा गया था।

इसके बावजूद, राज्य सरकार ने एक दिसंबर 2025, फिर 20 जनवरी 2026 और 21 जनवरी 2026 को तबादलों और पदस्थापनों की अधिसूचनायें जारी कीं, जिससे तीन आईएएस अधिकारी अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे प्रभावित हुए।

‎आयोग ने गौर किया कि तीनों अधिकारियों का तबादला उसकी मंजूरी के बिना किया गया था, जबकि वे चुनाव से संबंधित एक महत्वपूर्ण कार्य में लगे हुए थे।

पत्र में कहा गया है कि तबादलों के आदेश तत्काल रद्द किए जायें। साथ ही भविष्य में ऐसे किसी भी निर्णय के लिए राज्य को आयोग की पूर्व सहमति लेनी होगी।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार से 28 जनवरी को अपराह्न तीन बजे तक अनुपालना रिपोर्ट भेजने को कहा है।

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