कोलकाता , मार्च 23 -- चुनाव आयोग ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) को हटाने का आदेश दिया, जिनमें से ज़्यादातर उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) हैं।
आयोग ने यह यह निर्णय उस दिन आया, जिस दिन राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों को पश्चिम बंगाल से बाहर पदस्थापित करने के चुनाव आयोग के फैसले को उच्च न्यायालय चुनौती दी।
इस ताज़ा कदम के साथ, राज्य में कुल आरओ में से लगभग एक-चौथाई को बदल दिया गया है। चुनाव आयोग ने सोमवार देर शाम एक विस्तृत निर्देश जारी कर इस फेरबदल की पुष्टि की। अधिसूचना के अनुसार, कई प्रमुख उप-मंडलों में नये एसडीओ नियुक्त किए गये हैं, जिनमें कूच बिहार का तूफानगंज, जलपाईगुड़ी, मालदा सदर, मुर्शिदाबाद का लालबाग, बैरकपुर, बिधाननगर, बारासात, कैनिंग, बारुईपुर, अलीपुर, हावड़ा सदर, हुगली सदर, तामलुक, कोंताई, हल्दिया, एगरा, घाटल, दुर्गापुर और आसनसोल शामिल हैं।
यह घटनाक्रम पिछले बुधवार को जारी एक पहले के निर्देश के बाद हुआ है, जब आयोग ने 11 जिलों में नए ज़िलाधिकारियों (डीएम ) की नियुक्ति की घोषणा की थी, जिनमें कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, पुरबा बर्धमान, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, दार्जिलिंग और अलीपुरद्वार शामिल हैं। ये सभी ज़िला निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत थे और अब उन्हें फिर से नियुक्त किया गया है। साथ ही उन्हें एक ही समय पर नयी पोस्टिंग भी दी गई हैं। विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद से चुनाव आयोग ने नौकरशाही और पुलिस रैंकों में कई प्रशासनिक बदलाव किये हैं। चुनाव की तारीखें घोषित होने के तुरंत बाद राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटा दिया गया था। इसके बाद कोलकाता पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) के साथ-साथ कई ज़िलाधिकारियों और पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था। हालाँकि, राज्य सरकार ने हटाए गए कई अधिकारियों को वैकल्पिक भूमिकाओं में फिर से नियुक्त कर दिया है और आयोग के इन कदमों की कड़ी आलोचना की है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस तरह का बार-बार हस्तक्षेप अनुचित है।
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