कोलकाता , जनवरी 21 -- चुनाव आयोग तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं की सूची प्रकाशित करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में नो-मैपिंग मतदाताओं की सूची सार्वजनिक कर सकता है।

आयोग के सूत्रों ने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम दर्ज नहीं है और जिनके नाम में तार्किक विसंगतियां हैं उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश में तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

आयोग ने हालांकि इस निर्देश का पालन करने के अलावा नो-मैपिंग मतदाताओं की सूची को भी सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्णय लिया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, सूचियां पहले से ही जिला मजिस्ट्रेट-सह-जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पास उपलब्ध हैं। आयोग द्वारा औपचारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद सूचियां प्रकाशित की जाएंगी।

आयोग के सूत्रों ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 31,68,426 ऐसे मतदाता हैं जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, जबकि 94,49,132 मतदाताओं की पहचान तार्किक विसंगतियों के आधार पर की गई है। कुल मिलाकर, राज्य में लगभग 1.40 करोड़ लोगों को दस्तावेज़ सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया है।

इन नोटिस प्राप्तकर्ताओं को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, वे मतदाता जिनका नाम 2002 के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा हुआ है, वे मतदाता जिनका नाम 2002 के एसआईआर से नहीं जुड़ा हुआ है, और वे मतदाता जिनके नामों में तार्किक विसंगतियां हैं।

मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के संदर्भ में यह मुद्दा सामने आया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं की सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया। मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में 10 सूत्रीय विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया।

आयोग के सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के लिए सात फरवरी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित होने वाली है।

उन्होंने हालांकि संकेत दिया है कि सुनवाई की अवधि बढ़ाई जा सकती है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह भी संकेत मिला है कि अंतिम सूची के प्रकाशन की तिथि स्थगित की जा सकती है।

आयोग के सूत्रों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुरूप दिशानिर्देश बुधवार को जारी किए जाएंगे, जिसके बाद संशोधित कार्यक्रम के बारे में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।

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