नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कहा है कि उत्तरी सीमा से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति स्थिर बनी हुई है लेकिन निरंतर सतर्कता बनाये रखने की जरूरत है और वहां तैनात सैनिकों की संख्या में कमी विशेषज्ञ तथा कार्य समूहों के निर्देश के आधार पर लिया जायेगा। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शक्सगाम घाटी में चीन के निर्माण पर विरोध जताते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच 1963 के समझौते को भारत ने कभी नहीं माना और यह गैर कानूनी है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की ओर से परस्पर विश्वास बढाने की दिशा में कदम उठाये जाने से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सेना प्रमुख ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में कहा कि उत्तरी मोर्चे पर स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन निरंतर सतर्कता की आवश्यकता है। शीर्ष स्तर की बातचीत, संपर्क बढने और विश्वास बढाने के उपायों से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इसके परिणामस्वरूप उत्तरी सीमाओं से लगते क्षेत्रों में पशुओं के चराने, हाइड्रोथेरेपी शिविरों और अन्य गतिविधियों को भी संभव बनाया जा सका है।
उन्होंने कहा कि इस मोर्चे पर निरंतर बातचीत से वास्तविक नियंत्रण रेखा सैनिकों की तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है। साथ ही संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण के तहत क्षमता विकास और अवसंरचना कार्य भी आगे बढ़ रहा है।
सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों पक्ष धीरे-धीरे अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 में बनी समझ और उससे पहले दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच कजान में मुलाकात , इसके बाद तियानजिन बैठक और विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठकें भी होती रहीं। इसके अलावा हमारे रक्षा मंत्री ने उनके रक्षा मंत्री से दो बार मुलाकात की है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की भी बात हुई है। इन सबका परिणाम यह हुआ है कि दोनों पक्षों में सीमाओं को यथासंभव शांत और स्थिर बनाए रखने को लेकर एक तरह की तात्कालिकता और स्वीकार्यता बनी है, और यह भी समझ बनी है कि इसे कैसे किया जाए। इस दिशा में सबसे पहले बातचीत के स्तर को बढाया गया है। दोनों सेनाओं के बीच छोटे से लेकर बड़े स्तर पर बातचीत होती है और यह कोशिश की जाती है कि समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो जाये।
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