बीजिंग , मार्च 10 -- चीनी वैज्ञानिकों ने ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) के उपचार की दिशा में एक क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा 'मॉलिक्यूलर ब्रिज' (आणविक सेतु) बनाया है, जो कैंसर कोशिकाओं के छिपने की स्थिति में भी उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
प्रतिष्ठित जर्नल 'सेल' के नवीनतम अंक में प्रकाशित यह शोध भविष्य में कैंसर उपचार की प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ा सकता है।
चीनी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोसेस इंजीनियरिंग की शोध टीम ने पारंपरिक 'सीएआर-टी सेल थेरेपी' में सुधार करते हुए एक नया 'हेल्पर मॉलिक्यूल' विकसित किया है, जिसे 'फेस' नाम दिया गया है।
सामान्यतः 'सीएआर-टी सेल थेरेपी' में मरीज की टी-कोशिकाओं (इम्यून सेल्स) को लैब में संशोधित कर कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। हालांकि, कई मामलों में कैंसर कोशिकाएं अपनी सतह से उन निशानों (मार्करों) को हटा देती हैं जिन्हें टी-कोशिकाएं पहचानती हैं। इससे कैंसर कोशिकाएं अदृश्य हो जाती हैं और उपचार विफल हो जाता है।
प्रमुख शोधकर्ता वेई वेई के अनुसार, उनकी टीम ने पाया कि ल्यूकेमिया और इम्यून कोशिकाओं, दोनों की सतह पर 'सीडी71' नामक प्रोटीन बड़ी मात्रा में होता है। उन्होंने 'फेर्रिटिन' से 'फेस' मॉलिक्यूल तैयार किया जो दोनों कोशिकाओं को आपस में एक मजबूत गोंद या पुल की तरह जोड़ देता है। इससे टी-कोशिकाएं छिपी हुई कैंसर कोशिकाओं को भी पकड़कर नष्ट कर देती हैं।
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