नयी दिल्ली , मार्च 13 -- लोकसभा ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,81,289.26 करोड़ रुपए की पूरक अनुदान मांगों और इससे संबंधित विनियोग विधेयक को शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'वर्ष 2025-26 के लिए दूसरी पूरक अनुदान मांग' पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में स्थिरता, राजकोषीय अनुशासन और सतत विकास बनाए रखा है और पश्चिम एशिया के कारण अचानक आये जैसे संकटों से निपटने के लिए 'आर्थिक स्थिरता कोष' को मजबूत करने का काम किया है। इन पूरक मांगों में 59 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था इस कोष के लिए की गई है। उनका कहना था कि वैश्विक घटनाओं या अन्य कारणों से आर्थिक उतार चढ़ाव आते रहते हैं तो उस स्थिति में देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत तथा स्थिर बनाए रखने के लिए यह निधि अत्यंत उपयुक्त होती है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इन मांगों पर चर्चा में 33 सदस्यों ने हिस्सा लिया लेकिन ज्यादातर सदस्यों ने आम बजट पर ही अपनी बात रखी। उनका कहना था कि सदस्यों को बताना जरूरी है कि पूरक अनुदान मांगों का यह दूसरा बैच है और यह चालू वित्त वर्ष के लिए है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरक मांगों को घटाकर एक या दो कर दिया गया है। वह तो इसे एक ही करने के पक्ष में थीं लेकिन राज्यों की मांगें होती हैं और दूसरे खर्च होते हैं इसलिए इनकी संख्या दो तक कर दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुले दिमाग से तथा लचीलेपन के साथ पूरक मांगे लाती हैं। वर्तमान में 9 हजार 200 करोड़ की जरूरत है और उसे भी इन मांगों की 69 मदों में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति स्थिरता, राजकोषीय अनुशासन, सतत विकास और मध्यम मुद्रास्फीति से चिह्नित रही है। इस प्रगति का श्रेय संरचनात्मक सुधारों और मजबूत सार्वजनिक निवेश को जाता है। अवसंरचना विकास में गति बनाए रखने के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को पिछले बजट के 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये करने के साथ ही सरकार अवसंरचना जोखिम गारंटी कोष भी स्थापित करेगी, जो ऋणदाताओं को आंशिक ऋण गारंटी प्रदान करेगा। अवसंरचना परियोजनाओं में निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र के लिए 41 हजार करोड से ज्यादा की पूरक अनुदान मांगे हैं। इसमें दूर संचार क्षेत्र के लिए अलग से प्रावधान किया गया है ताकि सैन्य दूरसंचार नेटवर्क तथा तत्संबंधी दिक्कतों का आसानी से निराकरण किया जा सके। वित्तमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों के कल्याण पर सरकार का विशेष ध्यान है और इसमें 6140 करोड़ रुपए का प्रावधान है। पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के लिए भी इसमें निधि का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति को मजबूत करने के लिए उर्वरक सब्सिडी पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसानों को उर्वरक सब्सिडी के लिए 19230 करोड रुपए की व्यवस्था की गई है। किसानों को असुविधा नहीं हो इसके लिए भारतीय खाद्यान्न निगम के जरिए गरीब कल्याण अन्न कोष बनाया गया है जिसके तहत गरीबों को राशन दिया जा रहा है। घरेलू स्तर पर खाद के उत्पादन को बढाया जा रहा है। यूरिया उत्पादन 225 लाख टन से बढकर तीन लाख टन से अधिक हो गया है। उनका कहना था कि सरकार ने खाद के छह कारखाने स्थापित किये हैं और इनसे हर साल 12.7 लाख टन खाद का उत्पादन हो रहा है और इसे जल्द ही 25 लाख टन तक लाने की योजना है।
श्रीमती सीतारमण ने मनरेगा का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जीरामजी नाम से नया कानून ग्रामीण श्रमिकों के लिए लायी है और उसमें 95000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है लेकिन यह कानून अप्रैल से लागू होगा लेकिन मनरेगा के तहत ग्रामीण श्रमिकों को दिक्कत नहीं हो इसके लिए 30000 करोड़ रुपए का प्रावधान पूरक अनुदान मांगों के इस बैच में किया गया है। जलजीवन मिशन के तहत बजट में 67000 करोड रुपए का प्रावधान पिछले वर्ष के लिए था जिसे बढाकर अब 67670 करोड़ रुपए किया जा रहा है। यह योजना 2028 तक चलेगी।
वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्योगों का जिक्र किया और कहा कि इसे मजबूत करने के लिए 30 हजार करोड रुपए की व्यवस्था की गई है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत अनुमानित है, जो 2025-26 के 4.4 प्रतिशत से बेहतर है। उन्होंने यह भी कहा कि 2026-27 में ऋण-से-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह 56.1 प्रतिशत था।
संशोधित अनुमानों के अनुसार, गैर-ऋण प्राप्तियां 34 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 49.6 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें लगभग 11 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय शामिल है। उनका कहना था कि 2026-27 के लिए, गैर-ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
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