पटना , मार्च 24 -- केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की ओर से पुलिस में चालक सिपाही के चार हजार 361 पदों पर भर्ती के लिये 12 से 24 मार्च तक शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) आयोजित की गई।

राजधानी के गर्दनीबाग स्थित शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह राजकीय उच्च विद्यालय (पटना हाई स्कूल) में आयोजित इस परीक्षा में 14 हजार 628 अभ्यर्थी भौतिक रूप से शामिल हुए, जिसमें 14 हजार 189 पुरुष और 439 महिलाएं शामिल हैं। पीईटी परीक्षा के लिए 15 हजार 516 अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के परिणाम के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया था। शारीरिक दक्षता परीक्षा संपन्न होने का बाद अंतिम मेधा सूची तैयार करके जल्द ही अंतिम परिणाम जारी किया जाएगा।

परीक्षा कार्यक्रम में 10 कार्यदिवसों में परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें नौ दिन पुरुष और एक दिन महिला अभ्यर्थियों की परीक्षा ली गई। प्रत्येक दिन अभ्यर्थियों के शारीरिक दक्षता, शारीरिक माप का कार्य संपन्न कराया गया है। पीईटी परीक्षा को सुचारू तरीके से कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए पर्षद की तरफ से व्यापक तकनीकी व्यवस्थाएं की गई।

अभ्यर्थियों की उपस्थिति, उनकी पहचान तथा पहचान बदलकर दूसरे को बैठाने की संभावना को दूर करने के लिए आवेदन के फोटो, लिखित परीक्षा के समय लिए गए फोटो, बॉयोमेट्रिक चिन्हों तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान उनके फोटो, फिंगर प्रिंट तथा अन्य सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकों का सहारा लिया गया। इसके साथ ही दौड़ में समय की गणना के लिए आरएफआईडी एवं सेंसर आधारित तकनीकों का उपयोग एवं अन्य स्पर्धाओं में इलेक्ट्रनिक उपकरणों की मदद से अत्याधुनिक तकनीकों से कार्य संपन्न कराया गया, जिससे सूचनाओं के संग्रहण में मानव हस्तक्षेप को कम किया जा सके।

चयन पर्षद के स्तर से जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है कि इस परीक्षा के दौरान 21 ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई, जिन्होंने परीक्षा में दूसरे के बदले बैठकर परीक्षा देने की कोशिश की या अन्य तरीकों से अभ्यर्थियों को सहयोग करने के प्रयास किए। इनमें चार अभियुक्त परीक्षा के अभ्यर्थी थे। इन तथ्यों के आधार पर चार कांड स्थानीय गर्दनीबाग थाना में दर्ज किए गए हैं। इसी क्रम में चार अभ्यर्थियों को जेल भेजा गया है। अन्य अभियुक्तों के खिलाफ जांच कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस तरह अवांछित तत्वों की तरफ से परीक्षा तंत्र में छेड़छाड़ करने के प्रयासों को प्रभावहीन किया गया। परीक्षा के दौरान 55 पुरुष अभ्यर्थियों को चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता पड़ी। इस परीक्षा के कदाचारमुक्त आयोजन के लिए बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी।

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