चंडीगढ़ , दिसम्बर 30 -- चंडीगढ़ नगर निगम की मंगलवार को आयोजित वर्ष की अंतिम हाउस बैठक में कुल छह प्रस्तावों पर चर्चा की गई जिनमें से दो प्रस्ताव पारित किए गए।

लंबी बहस और मतभेदों के बीच केवल दो प्रस्ताव ही पारित हो सके, जबकि चार प्रस्तावों पर न तो सहमति बन पाई और न ही उन्हें खारिज किया गया। बैठक के दौरान सदन का माहौल कई बार तनावपूर्ण भी रहा।

हाउस बैठक में फेज-वाइज शहर की पुरानी पाइपलाइन को बदलने और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के करीब 2500 वॉयलेशन मामलों में राहत देने से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन दोनों प्रस्तावों को शहरवासियों की सुविधा और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा सातों दिन चौबीस घंटे पेन सिटी जल आपूर्ति परियोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। परियोजना से जुड़े कुछ बिंदुओं पर सहमति जरूर बनी, लेकिन सभी पार्षदों की एक राय न होने के कारण इसे औपचारिक रूप से पास नहीं किया जा सका। इसी तरह वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम का प्रस्ताव भी विचाराधीन रखा गया, जबकि मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने से संबंधित एजेंडा पर भी निर्णय टाल दिया गया।

टेंडर प्रक्रिया में सुधार से जुड़े प्रस्ताव पर सदन ने और समीक्षा की जरूरत बताते हुए संबंधित विभाग को निर्देश दिए। बैठक के दौरान प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने पार्षदों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि बिना समुचित योजना के सड़कें खोदने से जनता में गलत संदेश जाता है और ऐसे कार्यों का असर चुनावी परिणामों पर भी पड़ सकता है।

प्रशासक ने जल आपूर्ति परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए बिना किसी शुल्क के डीपीआर तैयार करवाई गई है, जो एक असाधारण पहल है। उन्होंने पार्षदों से सदन की सीमाओं से बाहर निकलकर योजनाओं के फायदे और नुकसान को जमीनी स्तर पर देखने और जनता के हित में निर्णय लेने की अपील की।

कुल मिलाकर बैठक में कई अहम मुद्दों पर निर्णय नहीं हो सका, जिससे आने वाले समय में नगर निगम की अगली बैठकों में इन प्रस्तावों को लेकर फिर से गहन चर्चा होने के संकेत मिल रहे हैं।

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