नयी दिल्ली , फरवरी 18 -- घुटने में टीबी का का संक्रमण होने के बाद से कई साल से चलने फिरने में अक्षम युवक को इलाज के बाद चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक बार फिर से चलाने में सफलता पायी है।
जानकारी के मुताबिक उज़्बेकिस्तान के 25 वर्षीय युवक जमशेद बेक के घुटने की टीबी के कारण उनका पैर "डंडे जैसा" कठोर हो गया था, जिससे उनका चलन फिरना बंद हो गया था।
आकाश हेल्थकेयर के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार युवक को 13 साल की आयु में मरीज को बाएं घुटने में संक्रमण हुआ, जो आगे चलकर घुटने की टीबी में बदल गया। जिससे पैरों में जकड़न बढ़ती गई और घुटने के जोड़ की गतिशीलता पूरी तरह से समाप्त हो गई। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ी, चलना, सीढ़ियां चढ़ना, कार में बैठना और घुटने को मोड़ने से जुड़ी सभी सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो गईं। समय के साथ घुटने का लचीलेपन समाप्त होने के साथ ही वह पूरी तरह से कठोर और निष्क्रिय हो गया।
आकाश हेल्थकेयर में ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के प्रमुख डॉ. आशीष चौधरी ने बताया कि मरीज की परेशानी का पता चलने पर उसका प्राथमिक उपचार उज़्बेकिस्तान में किया, जहां जांच में घुटने की टीबी का पता चला। मरीज का पैर 13 वर्ष की आयु से ही डंडे जैसा कठोर हो चुका था। जोड़ पूरी तरह से आपस में जुड़ चुके थे और पिछले 12 वर्षों से नहीं चलने के कारण मांसपेशियाँ भी अत्यंत कमजोर हो गई थीं।
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