श्रीनगर , फरवरी 04 -- कश्मीर घाटी में मस्जिदों और दरगाहों में रात भर की नमाज़ के साथ शब-ए-बरात मनायी गयी।
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि शब-ए-बरात इस्लामी महीने शाबान की 15वीं रात को और रमज़ान के पवित्र महीने के शुरू होने से दो हफ्ते पहले मनायी जाती है। इस रात का मुसलमानों के लिए गहरा धार्मिक महत्व है, जो मानते हैं कि यह माफी और दुआ मांगने का समय है।
एक परंपरा के अनुसार, शब-ए-बरात की रात को ही आने वाले साल के लिए सभी लोगों की किस्मत तय होती है। मुख्य धार्मिक सभाएं डल झील के किनारे स्थित हज़रतबल दरगाह में हुईं, जहां पैगंबर मुहम्मद की दाढ़ी का पवित्र बाल रखा हुआ है। हज़रतबल में रात भर श्रद्धालु नमाज़ पढ़ते देखे गये। श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में रात भर की नमाज़ की इजाज़त नहीं दी गयी। अधिकारियों ने मस्जिद बंद कर दी और मस्जिद के इमाम मीरवाइज़ उमर फारूक को घर में नज़रबंद कर दिया।
जामिया मस्जिद का प्रबंधन करने वाले अंजुमन औकाफ के अनुसार, यह लगातार सातवां साल है जब अधिकारियों ने श्रीनगर की बड़ी मस्जिद में सामूहिक रात की नमाज़ की इजाज़त नहीं दी।
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