भोपाल , दिसम्बर 19 -- मध्यप्रदेश ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास के साथ-साथ श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में बीते दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए आत्मनिर्भर पंचायतों और सशक्त श्रमिक समाज की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। यह जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।

मंत्री श्री पटेल ने बताया कि पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त करने के लिए Rs.922.20 करोड़ की लागत से 2472 अटल ग्राम सेवा सदन, 106 अटल सुशासन भवन एवं 5 अटल जिला सुशासन भवन स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही 3755 सामुदायिक भवनों, नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों, पर्यटन विकास और पौधरोपण कार्यों को गति दी गई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित विभिन्न योजनाओं में 1250 किलोमीटर से अधिक सड़कों और 323 पुलों का निर्माण किया गया है, वहीं 20,600 से अधिक बसाहटों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है।

महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत वैज्ञानिक सॉफ्टवेयर SIPRI के माध्यम से पारदर्शी कार्य चयन किया गया। वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में लेबर बजट का 94 से 95 प्रतिशत तक सृजन हुआ है। अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत Rs.3000 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 86 हजार से अधिक खेत तालाब, 1 लाख से अधिक कूप रिचार्ज और 536 अमृत सरोवर शामिल हैं। 'कैच द रेन' अभियान में प्रदेश को देश में चौथा स्थान मिला है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 29 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित हुए हैं। Rs.500 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है और 11.27 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और पीएम जनमन योजना में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 99 प्रतिशत से अधिक ग्रामों को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है।

श्रम विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना के अंतर्गत विगत दो वर्षों में 1,07,536 प्रकरणों में Rs.2333 करोड़ का भुगतान किया गया। श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए SHREE अवधारणा के तहत स्वास्थ्य कार्यशालाएं आयोजित की गईं तथा औद्योगिक क्षेत्रों में सेफ्टी और एचआर अधिकारियों के प्रशिक्षण सत्र हुए। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में कार्य करने की अनुमति, जोनल सेफ्टी काउंसिल का गठन और सोशल मीडिया के माध्यम से एआई आधारित जागरूकता वीडियो जैसे नवाचार लागू किए गए हैं।

आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत नवीन श्रम संहिताओं के अनुरूप राज्य नियमों का निर्माण, एआई आधारित लेबर केस मैनेजमेंट सिस्टम, उद्योग विभाग के सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकरण तथा श्रमिक सुविधाओं के लिए अकाउंट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा।

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि गांवों और श्रमिकों को आत्मनिर्भर, सशक्त और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश ग्रामीण विकास और श्रम कल्याण के क्षेत्र में राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरेगा।

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