नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम , दिसंबर 17 -- केरल में सत्तारुढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के संयोजक टी पी रामकृष्णन ने कहा है कि केंद्र सरकार की मनरेगा ग्रामीण रोज़गार और आजीविका गारंटी योजना में प्रस्तावित 60:40 वित्तपोषण फॉर्मूला केंद्र का अपनी ज़िम्मेदारी से बचने का स्पष्ट प्रयास है।
श्री राकृष्णन ने कहा कि कई राज्य सरकारें पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट में हैं, और बोझ का एक बड़ा हिस्सा राज्यों पर डालने से आखिरकार ग्रामीण भारत के लोगों को निश्चित रोज़गार देने के लिए बनाए गए एक दूरदर्शी कार्यक्रम को कमज़ोर किया जाएगा।उन्होंने कहा, "एलडीएफ ने मनरेगा की जगह प्रस्तावित नए विधेयक के खिलाफ 22 दिसंबर को केरल के अलग-अलग ज़िलों में केंद्र सरकार के दफ्तरों के सामने धरने का आह्वान किया है। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े ट्रेड यूनियनों के सदस्य इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।"उन्होंने कहा कि केरल उन राज्यों में से है जिसने स्थानीय स्व-सरकारी संस्थानों के ज़रिए मनरेगा योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है, और इस कार्यक्रम ने राज्य में ग्रामीण संकट को कम करने में काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि हालांकि मनरेगा के फायदे आधिकारिक तौर पर ग्रामीण इलाकों तक सीमित हैं, लेकिन केरल सरकार ने अय्यंकाली नाम की एक राज्य-विशिष्ट योजना शुरू करके शहरी इलाकों में भी इसी तरह के फायदे दिए हैं।
श्री रामकृष्णन ने कहा कि नया 60:40 फॉर्मूला केरल जैसे राज्यों का वित्तीय रूप से गला घोंट देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा मंज़ूरी के लिए मनरेगा कोष का पहले से ही बहुत बड़ा बकाया लंबित है। उन्होंने इस योजना के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाल के केंद्रीय बजट में मनरेगा के लिए आवंटन नहीं बढ़ाया गया है, और न ही पिछले कुछ सालों में इस योजना के तहत मज़दूरी में संशोधन किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, "इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने से सत्ताधारी भाजपा का एजेंडा साफ है।"उन्होंने केंद्र सरकार से नए 'विकसित भारत - जी राम जी विधेयक ' को आगे न बढ़ाने का आग्रह किया।
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