पटना , मार्च 08 -- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं की समस्याओं को सुनने, उन्हें दर्ज करने और उनके त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और पीरामल फाउंडेशन फॉर एजुकेशन लीडरशिप के सहयोग से स्थापित "जीविका-दीदी की आवाज़ केंद्र" का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र जीविका-दीदी अधिकार केंद्र के लिए एक सपोर्ट-कम-कमांड सेंटर (सहयोग-सह-नियंत्रण कक्ष) के रूप में कार्य करेगा, जहां राज्य भर से आने वाली शिकायतों और समस्याओं का समन्वित तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

जेंडर रिसोर्स सेंटर दीदी की आवाज़ केंद्र के लिए कोऑर्डिनेटिंग सेंटर के तौर पर काम करेगा। इसके अलावा, इसका का लीगल एड सेल,संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ)लीडर्स और दूसरे रिप्रेजेंटेटिव्स की ट्रेनिंग के लिए कोऑर्डिनेटिंग सेंटर के तौर पर काम करेगा।

कार्यक्रम के दौरान भागलपुर से दीदी अधिकार केंद्र की समन्वयक रूबी दीदी और पटना से सुलेखा दीदी ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे दीदी अधिकार केंद्र ग्रामीण महिलाओं को अधिकारों की जानकारी देने, शिकायत दर्ज कराने और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस अवसर पर चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना के रजिस्ट्रार, प्रो. (डॉ.) एस. पी. सिंह, ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को गर्व है कि वह इस महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा बनकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में योगदान दे रहा है।

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