पटना , मार्च 05 -- बिहार ग्रामीण कार्य विभाग ने अपने अभियंताओं को आईआईटी पटना से विशेष प्रशिक्षण दिलाने की पहल की है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी ग्रामीण पथ या पुल उच्च गुणवत्ता के साथ निर्मित हो।

ग्रामीण कार्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों एवं पुलों के निर्माण को उच्च गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती के साथ सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं में केवल अधोसंरचना के विस्तार ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की दीर्घकालिक गुणवत्ता को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी क्रम में विभाग ने अपने अभियंताओं को आईआईटी पटना से विशेष प्रशिक्षण दिलाने की पहल की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी ग्रामीण पथ या पुल उच्च गुणवत्ता के साथ निर्मित हो।

विभाग की इस प्रशिक्षण योजना के तहत ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यरत नवनियुक्त 480 सहायक अभियंताओं (असैनिक) को आईआईटी पटना में चरणबद्ध रूप से विशेष प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। इन अभियंताओं को उनके क्षेत्राधीन क्रियान्वित किए जा रहे पथों एवं पुलों के निर्माण में तकनीकी मानकों के अनुरूप कार्य करने और नई तकनीकों का उपयोग कर अपनी कार्य क्षमता को सुदृढ़ करने के गुर सिखाए जा रहे हैं। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक 120 सहायक अभियंताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं, शेष 360 सहायक अभियंताओं को भी जुलाई 2026 तक आईआईटी पटना से प्रशिक्षण दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का सीधा लाभ राज्य की उन सभी योजनाओं को मिलेगा, जिन्हें आगामी वित्तीय वर्ष में धरातल पर उतारा जाना है। ग्रामीण क्षेत्रों को उद्योगोन्मुखी करने और बारहमासी सड़क सम्पर्कता सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार ग्रामीण पथों का विस्तार कर रहा है। वहीं आईआईटी जैसी संस्थाओं के प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण कार्य विभाग बिहार के ग्रामीण सम्पर्कता को दीर्घकालिक बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

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