नैनीताल , अप्रैल 28 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा वैश्वी तोमर की संदिग्ध मौत के मामले में मंगलवार को सख्त रुख अख्तियार करते हुए प्रदेश सरकार से पूछा है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 194 का अनुपालन क्यों नहीं किया गया है।

मृतका के पिता राम कृष्ण तोमर की याचिका पर न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ में सुनवाई हुई। सरकार की ओर से आज इस प्रकरण में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद है। आगे कहा गया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 194 का अनुपालन नहीं किया गया है।

प्रावधान है कि थाना क्षेत्र में हुई आत्महत्या की सूचना पुलिस की ओर से सर्वप्रथम संबंधित मजिस्ट्रेट को दी जाती है। मजिस्ट्रेट की अगुवाई में पंचनामा के साथ ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अपनाई जाती है लेकिन इस प्रकरण में प्रावधानों और नियमों को ताक पर रख दिया गया। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले में आगामी शनिवार को सुनवाई होगी।

यहां बता दें कि भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा वैश्वी तोमर की पिछले साल संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप है पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया और याचिकाकर्ता को लखनऊ में जीरो एफआईआर दर्ज कराने को मजबूर होना पड़ा।

याचिका में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया गया कि मृतका कालेज के ही छात्रावास में रहती थी। कालेज का समय समाप्त होने के बाद अक्सर वह घर बात करती थी। इस घटना से पहले मृतका द्वारा बताया गया कि वह कालेज में रैंगिग से परेशान है और कहा कि कुछ वरिष्ठ छात्र उसको परेशान कर रहे हैं।

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