पटना , फरवरी 12 -- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत बेगूसराय जिला के बरौनी - 2 ग्राम पंचायत में स्थापित बायोगैस संयंत्र से कई घर-दुकानों को सस्ता बायोगैस मिल रहा है, जिससे रसोई पक रही है, वहीं, जैविक उर्वरक भी तैयार हो रहा है, जिससे खेतों की सेहत सुदृढ हो रही है और रोजगार भी सृजित हो रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत बेगूसराय जिला के तेघरा प्रखंड के बरौनी - 2 ग्राम पंचायत में गोबरधन योजना संचालित है । इसके तहत सभी जिला में एक-एक गोबरधन बोयोगैस संयंत्र स्थापित किये गये हैं। यह बायोगैस संयंत्र 2 मीट्रिक टन क्षमता का है, जिसे स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत गोबरधन योजना अंतर्गत करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित किया गया है । बायोगैस संयंत्र के संचालन के लिए रोजाना गोबर की कमी न हो, इस चुनौती के समाधान के लिए इसकी स्थापना एक गोशाला के निकट की गयी। इस संयंत्र में स्लरी के प्रभावी प्रबंधन के लिए डी-वाटरिंग प्लांट भी स्थापित किया गया है, जिससे बायोगैस उत्पादन उपरांत स्लरी से पानी और ठोस गोबर को अलग किया जाता है। स्लरी का उपयोग तरल उर्वरक के रूप में सीधे खेती-बाड़ी में उपयोग किया जा सकता है । उपयोग नहीं होने पर ठोस गोबर को छान कर एवं सुखा कर बाद में जैविक खाद का निर्माण कर लिया जाता है ।

इस बायोगैस संयंत्र का संचालन जीविका ग्राम संगठन की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है । इच्छुक जीविका दीदियों को संयंत्र के तकनीकी प्रबंधन, रखरखाव और संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे वे संयंत्र की सभी प्रक्रियाओं को आत्मनिर्भरता से संभाल सकें ।

जिला सलाहकार क्षमतावर्धन एवं सूचना, शिक्षा एवं संचार अफताब आलम ने बताया कि गोबरधन योजना अंतर्गत निर्मित बायोगैस संयंत्र से आसपास के करीब 22 घरों एवं 5 दुकानों को बायोगैस उपलब्ध कराये जा रहे हैं। एक पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया गया है, जिसके द्वारा गैस की आपूर्ति की जा रही है ।

जिला समन्वयक, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान बेगूसराय विश्वजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान में तीन जीविका दीदियां इस संयंत्र को संचालित कर रही हैं। बायोगैस की बिक्री से प्रति माह 10000-12000 रुपये की प्राप्ति हो रही है । वहीं उर्वरक की बिक्री से 2000-2500 रुपये प्रति माह की आय हो रही है । गोबर की आपूर्ति एवं संयंत्र संचालन के लिए बिजली पर व्यय होता है । शेष रकम से तीन जीविका दीदियों को रोजगार मिला है । वह बताते हैं सबसे बड़ा फायदा यह है कि गोशाला और इस गांव में जहां-तहां गोबर के ढेर लगे रहते थे। गंदगी रहती थी। गोबरधन बायोगैस इकाई लगने से गोबर का बहुतायत उपयोग हो रहा है और गांव स्वच्छ दिख रहा है । गोबर से हरित ऊर्जा मिल रही है। उर्वरक का निर्माण हो रहा है ।

गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अंतर्गत गोबरधन योजना के तहत जिला स्तर पर एक-एक बायोगैस संयंत्र की स्थापना का प्रावधान है । गोबरधन इकाई में पशुपालन बाहुल्य इलाकों में स्थापित की जाती है, जहां गोबर बहुतायत में उपलब्ध रहते हैं। गोबरधन बायोगैस संयंत्र में गोबर एवं कृषि अपशिष्ट से बायोगैस का उत्पादन एवं जैविक खाद का निर्माण किया जाता है । राज्य में अभी 38 गोबरधन इकाइयां स्थापित हैं ।

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