चंडीगढ़ , मार्च 13 -- पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शुक्रवार को भविष्य के शहरों को आकार देने में नागरिक-केंद्रित योजना के महत्व को दोहराया। श्री'अर्बन इनोवेशन समिट' को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शहरी विकास का मुख्य फोकस संतुलित, टिकाऊ और समावेशी योजना के माध्यम से नागरिकों के कल्याण, सुविधा और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुनियोजित शहर जीवंत, समावेशी और रहने योग्य स्थान बन सकते हैं, जहाँ निवासियों को आवश्यक सेवाओं, सामुदायिक सुविधाओं और एक स्वस्थ वातावरण तक आसान पहुँच प्राप्त हो। उन्होंने रेखांकित किया कि विचारशील योजना, मजबूत बुनियादी ढांचा और टिकाऊ नीतियां भविष्य के लिए तैयार शहरों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

शहरी शासन में नवाचार और सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री कटारिया ने इस शिखर सम्मेलन को एक मूल्यवान मंच बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शहरी योजनाकारों को विचार साझा करने और स्मार्ट व टिकाऊ विकास के समाधान विकसित करने के लिए एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शहरों को नागरिकों की खुशी और सुविधा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि विकास 'जन-उन्मुख' बना रहे। सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देने वाले डिजाइन और जीवंत सामुदायिक स्थान शहरों को रहने योग्य बनाने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षक बनाते हैं।

यह सम्मेलन नगर निगम चंडीगढ़ और इलेट्स टेक्नोमीडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें देशभर के 150 से अधिक प्रतिनिधियों और 30 से अधिक वक्ताओं (नीति निर्माताओं, तकनीक विशेषज्ञों और शासन विशेषज्ञों) ने भाग लिया।

नगर निगम चंडीगढ़ के आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि 2030 तक भारत की शहरी आबादी लगभग 60 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है, जो देश की जीडीपी में 70 प्रतिशत योगदान देगी। चंडीगढ़ नगर निगम डिजिटल तकनीकों को एकीकृत कर रहा है और जल्द ही स्मार्ट पार्किंग का दूसरा चरण शुरू करेगा।

चंडीगढ़ के महापौर सौरभ जोशी ने कहा कि विकसित भारत की ओर बढ़ते हुए शहरों को अधिक स्मार्ट, हरित और समावेशी होना चाहिए। उन्होंने सरकार, उद्योग और नागरिकों के बीच सहयोग पर जोर दिया।

शिखर सम्मेलन के दौरान डिजिटल गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, टिकाऊ बुनियादी ढांचे, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रसंस्करण और स्वच्छता जैसे विषयों पर पैनल चर्चा और प्रस्तुतियां दी गईं।

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