चंडीगढ़ , फरवरी 04 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बुधवार को, प्रेमगढ़ के सैनी माजरा गांव में स्थित गुरुद्वारा श्री अंब साहिब पातशाही सत्थी लांबा साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) की एक बीघा, छह विस्बे, 10 विस्बासियां भूमि को धोखाधड़ी से ट्रस्ट के नाम पर बेचने के मामले में, सख्त कार्रवाई करते हुए गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधक राजिंदर सिंह को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि यदि प्रबंधक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति इस मामले में संलिप्त पाया जाता है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की आगे की जांच के लिए एसजीपीसी के सदस्यों की एक समिति गठित की गई है और प्रबंधक द्वारा किए गए पंजीकरण को रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस मामले में हरजिंदर सिंह धामी ने चंडीगढ़ स्थित उप कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एसजीपीसी के किसी भी अधिकारी या गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधक को अपने स्तर पर गुरुघर से संबंधित किसी भी संपत्ति को बेचने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सिख संगठन किसी भूमि को बेचना या खरीदना चाहता है, तो यह कार्रवाई संबंधित गुरुद्वारा साहिब की संपत्ति उप-समिति के माध्यम से अंतरिम समिति की मंजूरी के बाद ही नियमित नियमों के अनुसार की जा सकती है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि इस मामले में आगे की विभागीय जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें एसजीपीसी की अंतरिम सदस्य हरजिंदर कौर, मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मनन, सदस्य चरणजीत सिंह कालेवाल, सुरजीत सिंह भिट्टेवाड और परमजीत सिंह लखेवाल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा श्री अंब साहिब मोहाली के प्रबंधक राजिंदर सिंह ने गुरुद्वारा श्री अंब साहिब के सैनी माजरा गांव में स्थित इस जमीन को बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के चार खरीदारों को बेच दिया है, जिसका पंजीकरण दो दिसंबर 2025 को धोखाधड़ी से अलग-अलग लोगों के नाम पर किया गया था।

यह मामला कार्यालय के संज्ञान में आते ही तुरंत जांच के दायरे में लाया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधक राजिंदर सिंह ने कार्यालय के लेटरहेड पर जाली पत्र तैयार कर अधिकार प्राप्त किया था, जिसे उन्होंने स्वयं लिखित में स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि प्रबंधक ने संपत्ति को चार खरीदारों को बेचकर एक करोड़ 32 लाख रुपये के चार चेक प्राप्त किए, जिन्हें उन्होंने अपने निजी खाते में भुना लिया। उन्होंने यह भी बताया कि इसके अतिरिक्त भी राजिंदर सिंह ने करोड़ों रुपये एकत्र किए हैं, जिनके बारे में जांच दल को कोई जानकारी नहीं दी गई है। जांच अभी जारी है।

एडवोकेट धामी ने स्पष्ट किया कि गुरुघर के प्रति विश्वासघात करने वाले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद प्रबंधक राजिंदर सिंह को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित जमीनों के पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

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