अमृतसर , फ़रवरी 04 -- पंजाब प्रदेश भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के प्रवक्ता एवं सिख चिंतक प्रो़ सरचंद सिंह ख्याला ने बुधवार को कहा कि गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब बाबा दीप सिंह में भारतीय करेंसी नोटों पर मुहर लगाकर 'ख़ज़ाना' बांटने के गंभीर मामले में श्री अकाल तख़्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा उसी गुरुद्वारे के प्रबंधक जतिंदरपाल सिंह से जांच करवाना अनुचित है।

प्रो ख्याला ने, जिनके प्रबंधन के दौरान यह गुरमत विरोधी मनमानी कार्रवाई हुई, को ही इस मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए जाने पर गहरी हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि कोई भी जिम्मेदार जत्थेदार इस तरह का बचकाना, तर्कहीन और प्रशासनिक समझ से परे निर्णय कैसे ले सकता है। उन्होने कहा कि इस फैसले से स्पष्ट संकेत मिलता है कि कहीं इस मामले की सच्चाई की तह तक जाने के बजाय इसे दबाने या कमजोर करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि जहां गुरुद्वारे के भीतर या आसपास के क्षेत्रों में लगातार ऐसे कार्य हो रहे हों, वहां उस गुरुद्वारे का प्रबंधक स्वयं ही संदेह के घेरे में आ जाता है। ऐसी स्थिति में उसी व्यक्ति से जांच करवाना प्राकृतिक न्याय और स्थापित सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। यह भी असंभव नहीं कि प्रबंधक की इस पूरे मामले में किसी न किसी रूप में भूमिका हो, फिर उससे निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।

प्रो. ख्याला ने स्मरण करवाया कि श्री अकाल तख़्त साहिब कोई सामान्य संस्था नहीं, बल्कि सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक अदालत है। 'जत्थेदार' को यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि उनके द्वारा जारी किए गए आदेश ऐतिहासिक स्वरूप ग्रहण करते हैं, जिनसे भविष्य में मार्गदर्शन लिया जाता है, जो नज़ीर बनते हैं और जिनका ऐतिहासिक महत्व होता है। ऐसे में अधूरे तथ्यों पर आधारित या गलत सलाह के तहत लिए गए बचकाने आदेश जत्थेदार पद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि जत्थेदार को यह भी समझना चाहिए कि 328 पावन सरूपों के मामले में मीडिया पर लगाई गई पाबंदियां आज भी सिख संगत के मन में प्रश्न बनकर मौजूद हैं। मीडिया का कार्य सत्य को जनता तक पहुंचाना है, न कि उसे रोकना। लगातार इस प्रकार के फैसले यह संकेत दे रहे हैं कि जत्थेदार साहिब किसी सलाहकार मंडली के प्रभाव में कार्य कर रहे हैं।

प्रो. ख्याला ने कहा कि जत्थेदार गड़गज्ज द्वारा यह कहना कि 'सेवक जत्था इशनान' के नाम पर नोटों पर "ख़ज़ाना बाबा दीप सिंह जी" की मुहर लगाकर वितरण करना पूर्णतः मनमत और गुरमत विरोधी कृत्य है, यह कथन बिल्कुल सही है। गुरु घर में पैसों से जुड़े किसी भी प्रकार के 'ख़ज़ाने' की कोई परंपरा कभी नहीं रही।

उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब के ग्रंथी सिंह ज्ञानी दया सिंह द्वारा भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि गुरु घर की ओर से किसी को भी नोटों का कोई 'ख़ज़ाना' नहीं दिया जाता। गुरु घर का वास्तविक ख़ज़ाना नाम, बाणी, सेवा, सिमरन और मानवता की भलाई है-न कि मुहर लगे हुए नोट।

प्रो. ख्याला ने कहा कि यह तथ्य भी सामने आया है कि निकटवर्ती क्षेत्र लछमणसर चौक में बाबा दीप सिंह जी के नाम पर बने एक अन्य स्थान से यह मनमानी गतिविधि प्रारंभ हुई और बाद में गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब तक फैल गई। यह सब कुछ आंखें मूंदकर नहीं हो सकता। इसलिए इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए, जिसमें गुरमत विद्वान, कानूनी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हों।

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