नयी दिल्ली / चंडीगढ़ , अप्रैल 27 -- पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को गुरुग्राम में आवासीय भूखंडों के सामने किए गए अतिक्रमण और अन्य निर्माणों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ ने स्पष्ट किया कि अधिकारी कानून के अनुसार अतिक्रमण हटाने के लिए स्वतंत्र हैं।
मुख्य न्यायाधीश नागू ने कहा कि जहां तक नगर निगम के नियमों का सवाल है, उनको चुनौती नहीं दी गई है। यह न्यायालय उन्हें नहीं रोक सकता। सड़कों के दोनों ओर अतिक्रमण किया गया है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। चलने के लिए जगह की भारी कमी के कारण लोग अब ऐसी कॉलोनियों को छोड़ रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को यह मामला उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में लाया गया था। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष तत्काल उल्लेख करने की अनुमति दी और मुख्य न्यायाधीश से इस मामले की सुनवाई दोपहर 1 बजे के पहले या 1:45 बजे करने का अनुरोध किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ यह अनुरोध वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की एक याचिका पर दिया। उन्होंने 'स्टिल्ट प्लस फोर' आवासीय संरचनाओं को तोड़े जाने के खिलाफ तीन दिनों के लिए अंतरिम संरक्षण की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि कई इलाकों में तोड़फोड़ की कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि बिना पर्याप्त नोटिस के मकान ढहाये जा रहे हैं, जिससे निवासी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने तीन दिनों के लिए यथास्थिति बनाए रखने की मांग की ताकि प्रभावित पक्ष राहत के लिए उच्च न्यायालय पहुंच सकें।
उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित निर्माणों की अनधिकृत प्रकृति पर टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा, "ये अनधिकृत संरचनाएं हैं। उच्च न्यायालय के पास इस पर गौर करने की शक्ति है।"गौरतलब है कि यह मामला 'स्टिल्ट प्लस फोर' नीति के तहत बनी इमारतों से संबंधित है। इस तरह एक प्लॉट में सबसे नीचे पार्किंग बनाकर उसके ऊपर चार मंजिलों का निर्माण किया जाता है। एक जनहित याचिका के बाद पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस नीति पर रोक लगा दी थी। इसके बाद, अधिकारियों ने स्वीकृत योजनाओं के उल्लंघन के आरोपी निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। दूसरी ओर, निवासियों का तर्क है कि हालांकि नीति पर रोक लगाई गई थी, लेकिन बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ का कोई स्पष्ट आदेश नहीं था।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर मित्तल ने पीठ को बताया कि गुरुग्राम में अब तक 336 किलोमीटर लंबी गलियों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा, "लोगों ने अपने घरों के बाहर डीजी सेट, गार्ड रूम और बाड़ लगा रखी है। यहाँ तक कि कई जगहों पर सड़कों तक ऊंचे रैंप बना दिए गए हैं, जबकि नियम के अनुसार वे अपनी चारदीवारी के बाहर कार तक पार्क नहीं कर सकते।"श्री मित्तल ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल पिछले अदालती आदेश के कारण ही नहीं, बल्कि सड़कों पर आवाजाही के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों के उल्लंघन के मामले में अधिकारी नोटिस करेंगे, लेकिन सड़कों पर किए गए प्रत्यक्ष अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई ढील नहीं दी जाएगी।
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