गांधीनगर , फरवरी 03 -- गुजरात में 'जल संचय जनभागीदारी 2.0' अभियान के कामकाज की सर्वग्राही समीक्षा के लिए देश के जल शक्ति मंत्रालय और राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक हुई।

दिल्ली से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और जल शक्ति मंत्रालय के तहत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वी.एल. कांताराव और केंद्र सरकार के अन्य अधिकारियों के साथ गांधीनगर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मुख्य सचिव एम.के. दास और वरिष्ठ सचिव इस समीक्षा बैठक में शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंस में राज्य के बनासकांठा, कच्छ और राजकोट जिले के कलेक्टरों के प्रेजेंटेशन सहित विभिन्न जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने क्षेत्रों में 'जल संचय जनभागीदारी 2.0' अभियान की प्रगति और आगामी आयोजन की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्यमंत्री श्री पटेल ने समीक्षा बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के परिणामस्वरूप हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और उनका समाधान देने का मार्गदर्शन मिल रहा है। हमारा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कैसे उनके द्वारा चलाए गए 'कैच द रेन' अभियान और जल संचय की राष्ट्रव्यापी मुहिम का अधिक से अधिक लाभ गुजरात को मिले। उन्होंने जिला कलेक्टरों को सीख देते हुए कहा कि वे भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने जिलों में बरसाती पानी के संग्रहण और संचयन के कार्य करें। ये सभी ऐसे जनहित के कार्य हैं, जिनसे कर्तव्य निभाने के कार्य संतोष के साथ-साथ आत्मसंतोष भी मिलता है।

मुख्यमंत्री ने ऐसा वातावरण बनाने की हिमायत की जिसमें राज्य के जिलों के बीच जल संचय-जनभागीदारी अभियान के कार्यों को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो और जिन जिलों में जल संचय का काम कम हुआ हो, उन्हें भी अधिक कार्य करने का बल मिले। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विधायक को जल संचय-जल संग्रह के कार्यों के लिए 50 लाख रुपए का अनुदान आवंटित किया है, इस संदर्भ में यह सुनिश्चित करें कि इसका भी उपयोग जिलों में जल संचय के कार्यों के लिए हो। उन्होंने बैठक में जल संचय के व्यापक कार्यों को तेजी से शुरू करने का निर्देश दिया ताकि केंद्र सरकार द्वारा जल संचय जन भागीदारी योजना के अंतर्गत राज्य को आवंटित 553 करोड़ रुपए की अनुदान सहायता का संपूर्ण उपयोग मार्च- 2026 से पहले हो जाए।

श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि जल संचय-जल संग्रह क्षेत्र में गुजरात ने जो कार्य किया है, वह देश में मॉडल बन गया है। पुराने बोर रिचार्ज करने की 70 फीसदी राशि केंद्र सरकार द्वारा देने के निर्णय से बड़ा लाभ हुआ है। उन्होंने जल संचय के कार्यों में अधिक संख्या में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को जोड़ने के लिए एक सूची बनाकर उन्हें प्रेरित करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में लागू होने वाली विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत मिलने वाले फंड का 40 फीसदी जल संचय-जल संग्रह के कार्यों के लिए उपयोग में लिया जा सकता है, ऐसा उदार प्रावधान किया गया है।

उन्होंने इस योजना के अंतर्गत समय पर और योजनाबद्ध तरीके से धन खर्च करने का मार्गदर्शन देते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से वाटर स्ट्रक्चर बनाकर जल संचय-जल संग्रह क्षमता में निरंतर वृद्धि से प्रधानमंत्री के जल सुरक्षा-जल आत्मनिर्भरता का संकल्प पूरा हो सकेगा।

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