गांधीनगर , दिसंबर 30 -- गुजरात, केंद्र सरकार तथा उद्योगों की भागीदारी से पीपीपी मॉडल पर एक जनवरी 2026 से राज्य के गिफ्ट सिटी में इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (आईएआईआरओ) कार्यरत होगा।
सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि गिफ्ट सिटी में एक जनवरी से यह आईएआईआरओ स्पेशल परपज व्हीकल के रूप में कार्यरत हो जाएगा। इस इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन का गठन कंपनी अधिनियम 2013 की धारा आठ के अंतर्गत नॉन-प्रॉफिट मेकिंग इंस्टीट्यूट के रूप में किया जाएगा। इतना ही नहीं इस प्रोजेक्ट के लिए पहले पांच वर्ष के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें राज्य एवं केन्द्र सरकार तथा निजी भागीदार, तीनों का 33.33 प्रतिशत योगदान रहेगा।
इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस आईएआईआरओ के लिए एंकर निजी भागीदारी के रूप में जुड़ा है और वर्ष 2025-26 के लिए 25 करोड़ रुपये का योगदान देने वाला है। इस आईपीए में सिप्ला, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा जैसी कंपनियों सहित लगभग 23 अग्रणी फार्मा कंपनियों का समावेश होता है।
गुजरात की यह पहल भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया एआई मिशन तथा राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एआई एक्शन प्लान के उद्देश्यों के साथ सुसंगत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि तथा अन्य सेवाओं में परिवर्तनकारी सुधारों से लाखों लोगों के जीवन को अधिक सरल बनाकर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की गति वेगवान बनाने के लिए राज्य सरकार ने एआई टास्कफोर्स का गठन भी किया है। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अब आईएआईआरओ को एआई के लिए मल्टी डिसिप्लिनरी हब बनाने की मंशा रखी गयी है।
आईएआईआरओ की मुख्य गतिविधियों में अद्यतन एआई रिसर्च एंड डेवलपमेंट, एआई आधारित प्रोडक्ट्स तथा सॉल्यूशन्स के विकास एवं शैक्षणिक संस्थाओं, उद्योगों, स्टार्टअप्स तथा सरकार के बीच सहयोग को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) क्रिएशन, कैपेसिटी बिल्डिंग तथा पॉलिसी बेस्ड रिसर्च पर भी आईएआईआरओ फोकस करेगा। आईएआईआरओ हाइब्रिड कम्प्यूट मॉडल अंतर्गत कार्य करेगा। इसमें ऑन-प्रिमाइसेस जीपीयू इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ इंडियाएआई क्लाउड जैसे नेशनल प्लेटफॉर्म्स का समन्वय भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 2026 के प्रारंभ पर गिफ्ट सिटी में इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी है। यह पहल एआई के लिए कुशल एवं भावी मानव संसाधन तैयार करने के साथ-साथ एआई सेक्टर में भारत को ग्लोबल कम्पीटिटिव लीडर के रूप में स्थापित करेगी और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी इनोवेशन के लिए गुजरात का स्थान अधिक मजबूत बनाएगी।
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