संगरूर , दिसंबर 27 -- पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं विधायक परगट सिंह ने शनिवार को आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की 21साल पुरानी योजना मनरेगा को केंद्र की भाजपा सरकार सिर्फ दो गुजराती कारपोरेट घरानों को खुश करने के लिए खत्म करना चाहती है।

श्री सिंह ने कहा कि केंद्र पहले ही युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही है और अब 12 करोड़ लोगों को मिल रही 100 दिन रोजगार की गारंटी भी छीन रही है। इस स्कीम को पंजाब सरकार भी लागू करने में नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब सरकार अपने कार्यकाल के दौरान सिर्फ औसतन 50 दिन ही रोजगार दे पायी है, जबकि इस साल 2025 में 38 फीसदी लक्ष्य ही प्राप्त किया जा सका है। उन्होंने कहा कि जी राम जी स्कीम के तहत 40 फीसदी राज्यों की भागीदारी करने से राज्यों पर 30 से 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

श्री सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों से टैक्स क्लेक्शन पूरी ले रही है, लेकिन अब उनकी भागीदारी बढ़ा रही है, जोकि सरासर गलत फैसला है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पहले ही 4.17 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में दबी है। इन दिनों आप सरकार के पास वेतन देने तक का पैसा नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार स्कीम को कैसे चला पाएगी। उन्होंने कहा कि अब तक तो पंजाब सरकार को दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करना चाहिए था। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान सिर्फ एक दिन का विशेष सत्र रखकर बाकी मुद्दों को ही खत्म करने की कोशिश में है। उनको सामान्य सत्र बुलाना चाहिए, ताकि मनरेगा जैसे अति जरूरी मुद्दे के अलावा कानून- व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर भी विचार हो। आनंदपुर साहिब में भी सेशन बुलाकर 65 करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये, जिसका कोई मतलब नहीं था।

श्री सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को पूरी तरह कारपोरेट बना दिया है। यह फैसला सिर्फ कारपोरेट को सस्ती लेबर दिलाने के लिए किया जा रहा है। क्योंकि कोविड के दौरान लाखों की तादाद में श्रमिक अपने घरों में गये, लेकिन लौटे नहीं। उनको उनके राज्यों में ही मनरेगा में काम मिल गया, जिससे कारपोरेट घरानों को श्रमिक नहीं मिल पा रहे थे। आने वाले समय में केंद्र सरकार राइट टू फूड एक्ट भी उसी तरफ ले जाकर खत्म करने जा रही है। सरकार ने भारतीय खाद्य निगम को बेचने करने का काम शुरू कर दिया है।

पूर्व शिक्षा मंत्री ने किसान जत्थेबंदियों से अपील की है कि वह भी मजदूरों के साथ खड़ी हों। किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में किसान-मजदूर एकता का सांझा नारा लगाया गया था, अब समय आ गया है कि किसान मजदूरों के साथ खड़े हों। केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। हर संभव प्रयास करके मनरेगा को बचाया जाएगा, जिसके लिए गांव-गांव, गली-गली तक कांग्रेस कार्यकर्ता लड़ाई लडेंगे और आवाज बुलंद करेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित