बेंगलुरु , दिसंबर 27 -- भारतीय जनता पार्टी के कर्नाटक अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने शनिवार को कहा कि सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार कर्नाटक में "गुंडों की तरह शासन" कर रही है जहां धमकियों और कुप्रबंधन ने जवाबदेही एवं पारदर्शी प्रशासन की जगह ले ली है।
श्री येदियुरप्पा ने हाल ही में खत्म हुए बेलगावी शीतकालीन सत्र पर कहा कि उत्तरी कर्नाटक के ज़रूरी मुद्दों जैसे किसानों की परेशानी, सिंचाई परियोजनाओं और कानून-व्यवस्था पर बड़े पैमाने पर चर्चा के बावजूद मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार ठोस समाधान देने में नाकाम रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों ने सत्र से पहले लगभग एक महीना अपने विभागों को प्रभावी ढंग से संभालने के बजाय सामाजिक बैठकों में बिताया।
श्री येदियुरप्पा ने पशु तस्करी से निपटने के तरीके की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि नए सरकारी प्रस्तावों के ज़रिए उल्लंघन करने वालों को सज़ा से बचने दिया जा रहा है। उन्होंने चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ पर राज्य की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि लापरवाही के कारण लोगों की जान गयी, जबकि अधिकारियों ने ज़िम्मेदारी आरसीबी और डीएनए जैसी एजेंसियों पर डालने की कोशिश की।
श्री येदियुरप्पा ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए आवास मंत्री ज़मीर अहमद के निजी सचिव सरफराज खान के मामले पर बात की, जिनके घर से लोकायुक्त की छापेमारी के दौरान 14.35 करोड़ रुपये ज़ब्त किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने रिश्वतखोरी को बढ़ावा दिया और मुख्यमंत्री ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कांग्रेस सरकार की उन नीतियों के लिए भी आलोचना की जो "निवेशक-अनुकूल नहीं हैं," जिससे उद्योगों और उद्यमियों को कर्नाटक छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में बसवराज बोम्मई के कार्यकाल के दौरान रोज़गार पैदा करने के लिए किए गए समझौतों को लागू नहीं किया गया है, जिससे युवा बिना नौकरी के रह गए हैं।
उन्होंने गृहलक्ष्मी योजना में विरोधाभासों का ज़िक्र करते हुए कहा कि जहां गरीब महिलाओं को 2,000 रुपये की सहायता का वादा किया गया है, वहीं आबकारी के लक्ष्य बढ़ाए जा रहे हैं। व्यापारियों पर दबाव डाला जा रहा है, जिससे एक अनुचित स्थिति पैदा हो रही है।
श्री येदियुरप्पा ने शिक्षा नीति पर कहा कि दो साल सत्ता में रहने के बाद भी राज्य के पास कोई स्पष्ट शिक्षा नीति नहीं है। उन्होंने कर्नाटक के शिक्षकों के बजाय बाहरी विशेषज्ञ प्रोफेसर सुखदेव थोराट की नियुक्ति की आलोचना की। उन्होंने इसे पूरे राज्य के छात्रों के साथ अन्याय बताया।
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